रिपोर्ट के अनुसार, उच्च ध्वनि प्रदूषण की लंबी अवधि लोगों और नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय है। यूरोपियन यूनियन के कम से कम 20 प्रतिशत नागरिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक शोर की जद में हैं। रिपोर्ट में नियमित रूप से दिन में 8 घंटे 85 डेसीबल ध्वनि के संपर्क में रहने से सुनने की क्षमता स्थायी रूप से खत्म होने की आशंका व्यक्त की है। इतना ही नहीं, शहरों में लंबी अवधि तक अपेक्षाकृत कम ध्वनि प्रदूषण के संपर्क में रहने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप में लंबे वक्त तक ध्वनि प्रदूषण में रहने से सालाना 12,000 अकाल मृत्यु होती हैं, 48,000 हृदय रोग के नए मामले आते हैं और 2.2 करोड़ लोग चिड़चिड़ेपन से पीड़ित होते हैं। कनाडा के टोरंटो में 15 वर्ष लंबे अध्ययन में पाया गया है कि यातायात के शोर ने 8 प्रतिशत लोगों में हृदयाघात, मधुमेह का खतरा बढ़ा दिया जबकि 2 प्रतिशत लोगों में हाइपरटेंशन यानी उच्च रक्तचाप बढ़ा दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, कोरिया में हुआ अध्ययन बताता है कि दिन के समय ध्वनि में 1 डेसीबल की वृद्धि से कार्डियो (हृदय) और सेरेब्रोवास्कुलर (मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह से संबंधित) बीमारियों का खतरा 0.17 से 0.66 प्रतिशत बढ़ जाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 1999 के दिशा निर्देशों में रिहाइशी क्षेत्रों के लिए 55 डीबी (डेसीबल) मानक की सिफारिश की थी, जबकि यातायात व व्यवसायिक क्षेत्रों के लिए यह सीमा 70 डीबी थी। डब्ल्यूएचओ ने 2018 में स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सड़क पर ध्वनि प्रदूषण की सीमा दिन में 53 डीबी और रात में 45 डीबी निर्धारित की। रेलवे के ध्वनि प्रदूषण की सीमा दिन में 54 डीबी और रात में 44 डीबी, एयरक्राफ्ट की दिन में 45 डीबी और रात में 40 डीबी निर्धारित की है। भारत में रिहाइशी इलाकों में दिन के समय 55 डीबी का मानक है। यानी इससे अधिक शोर ध्वनि प्रदूषण की श्रेणी में आएगा।
क्षेत्रीय कार्यालय उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा मुरादाबाद में चार स्थानों जिला अस्पताल (शांत क्षेत्र), बुद्धि विहार (आवासीय कालोनी), बुध बाजार (वाणिज्यिक क्षेत्र) एवं लाकड़ी फाजलपुर (औद्योगिक क्षेत्र) में प्रति माह ध्वनि गुणवत्ता मापी जाती है। अक्तूबर 2021 से फरवरी 2022 तक जिला अस्पताल की औसत ध्वनि तीव्रता दिन के समय 62.1 डीबी, रात के समय 41.9 डीबी, बुद्धि विहार में दिन के समय 64.2 डीबी, रात के समय 51.4 डीबी, बुध बाजार में दिन के समय 67.2 डीबी और रात के समय 61 डीबी, लाकड़ी फाजलपुर में दिन के समय 72.4 डीबी और रात के समय 61.7 डीबी पाई गई।
यह बोले ईएनटी विशेषज्ञ
जैसे-जैसे शहर बढ़ते हैं, ध्वनि प्रदूषण पर्यावरण का प्रमुख खतरा बन जाता है। ध्वनि प्रदूषण का उच्च स्तर नींद पर असर डालकर मानव स्वास्थ्य और खुशहाली को प्रभावित करता है। लंबे समय तक यदि 114 डेसीबल ध्वनि प्रदूषण बना रहा तो व्यक्तियों के बहरे होने की आशंका रहती है। ध्वनि प्रदूषण से सुनने की क्षमता प्रभावित होगी और फिर मानसिक विकार भी उत्पन हो सकते हैं।
डॉ. जेसी अरोरा, ईएनटी विशेषज्ञ
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी ने यह कहा
हमारे पास उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर कहीं से भी यह प्रदर्शित नहीं हो रहा है कि मुरादाबाद में ध्वनि प्रदूषण की स्थिति बहुत खराब है। यूएन की रिपोर्ट को मैं आधारहीन मानता हूं। एक गलत रिपोर्ट से बहुत ज्यादा सनसनी पैदा हो गई है। हम अपने कार्य के लिए जिम्मेदार हैं और हमारे पास ध्वनि प्रदूषण से संबंधित मुरादाबाद का पूरा डाटा है। यदि प्रशासन और शासन द्वारा हमसे कभी भी जवाब मांगा जाएगा तो हम जवाब देंगे कि यूएन की रिपोर्ट पूरी तरह से गलत है।
विकास मिश्र, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड