मुरादाबाद के बहुचर्चित सराफ सतेंद्र रस्तोगी हत्याकांड के विवेचक शिशुपाल सिंह अपना बयान दर्ज कराने अदालत नहीं पहुंचे। इस समय वह जिला अलीगढ़ के थाना सासनी गेट में तैनात हैं। अदालत ने उनका वेतन रोकने के लिए अलीगढ़ डीएम को आदेश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होगी।
मुगलपुरा थाना क्षेत्र के कानून गोयान निवासी सराफ सत्येंद्र रस्तोगी की दुकान जयंतीपुर में थी। मझोला थाने में 27 जनवरी 2014 में सराफ सत्येंद्र रस्तोगी की हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप लगाया था कि चोरी के एक मुकदमे में मूंढापांडे थाने के तत्कालीन प्रभारी सैय्यद मंसूर आबिद अपने हमराह कांस्टेबल महेंद्र सिंह, राहुल यादव, अमरपाल और अमित के साथ सत्येंद्र रस्तोगी को उठा कर थाने ले गए थे।
आरोप है कि पूछताछ के दौरान सराफ की मौत हो गई थी। जिसकी लाश को जनपद रामपुर के पटवाई थाना क्षेत्र के जंगल में फेंक दिया था। इससे पहले ही सत्येंद्र रस्तोगी के भाई विजेंद्र रस्तोगी ने मझोला थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। जिसमें कहा गया था कि उसका भाई जयंतीपुर स्थित अपनी दुकान बंद करने के बाद घर नहीं आए हैं।
इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय सरोज कुमार यादव की अदालत में विचाराधीन है। अतिरिक्त जिला शासकीय अधिवक्ता मुनीश भटनागर ने बताया कि मुकदमे के विवेचक मझोला थाने में तैनात रहे शिशुपाल सिंह थे। शिशुपाल वर्तमान में जिला अलीगढ़ के थाना सासनी गेट में तैनात हैं। वह अपने बयान दर्ज कराने के लिए नहीं आ रहे हैं। उन्हें कई बार नोटिस भेजा जा चुका है।