पुलिस ने मामले में आरोपी बनाए गए सिराज अहमद, रईस दूल्हा, आबिद, मोबीस को क्लीन चिट दे दी और मृतका के भाई निसार आलम, अमीर आलम व इल्यास के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के बाद गुरुवार को फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से शासकीय अधिवक्ता अमित सक्सेना ने आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सुबूत पेश किए। साथ ही एफएसएल की रिपोर्ट भी पेश करते हुए आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि आरोपियों ने 12 साल की बालिका की निर्मम तरीके से गला काटकर हत्या कर दी, ये जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है।
वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि अधिकतर गवाह अपने पूर्व में दिए गए बयानों से मुकर गए। पत्रावली पर अभियोजन पक्ष अपना केस साबित करने में विफल रहा। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद जिला जज सत्यप्रकाश त्रिपाठी ने हत्या के दोषी मृतका के सगे भाई निसार आलम व अमीर आलम के साथ ही उसके बहनोई इल्यास को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सभी अभियुक्तों को अंतिम सांस तक जेल में रखा जाए।
एफएसएल की रिपोर्ट बनी महत्वपूर्ण साक्ष्य
जिला शासकीय अधिवक्ता अमित सक्सेना ने बताया कि हत्या में प्रयुक्त चाकू को लैब भेजा गया था। लैब की रिपोर्ट में ये बात सामने आई कि चाकू पर लगा खून आरोपियों का नहीं था। चाकू पर जो ब्लड मिला वह मृतका के भाई निसार का था। इसके बाद पुलिस ने मृतका के भाइयों को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो मामला खुल गया। जिला शासकीय अधिवक्ता ने कहा कि नाजिया की हत्या सिर्फ इसलिए की गई थी कि ताकि उनके विरोधी जेल जा सकें। पुलिस की विवेचना में सच्चाई सामने आई और असली अपराधी जेल पहुंच गए।