चार बीघा जमीन के लिए सास की हत्या करने वाली बहू को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 55 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। डिलारी थाने में 27 मई 2023 को काजीपुरा निवासी आबिद हुसैन पुत्र इमाम बक्श ने मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें उसने बताया था कि 27 मई की सुबह उसके भांजे सद्दाम का फोन आया था। भांजे ने बताया कि मां मैसर जहां की बाथरूम में गिर कर मौत हो गई है। आबिद हुसैन ने गांव जाकर देखा तो मैसर जहां के गले और माथे पर चोट के निशान थे।
मैसर जहां के चार बच्चे थे। वह अपने बड़े बेटे सद्दाम हुसैन के साथ ही रहती थी। सद्दाम की पत्नी भूरी और मेरी बहन का विवाद रहता था। बहन के नाम चार बीघा जमीन थी। जिसे भूरी अपने नाम कराना चाहती थी। इसी बात को लेकर पहले भी भूरी और मैसर जहां में झगड़ा हुआ था।
इस मामले में पुलिस ने आरोपी भूरी के खिलाफ केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में भूरी ने बताया था कि वह चार बीघा जमीन अपने नाम कराना चाहती थी लेकिन सास मैसर जहां तैयार नहीं थी। इसलिए उसने गला घोंटकर सास की हत्या की थी। पुलिस ने आरोपी महिला को जेल भेज दिया था। जिसकी बाद में जमानत हो गई थी।
मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संख्या छह संदीप गुप्ता की अदालत में की गई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नीलम वर्मा ने बताया कि इस मामले में वादी पक्ष के अधिकांश गवाह पक्ष द्रोही हो गए थे। लेकिन उनसे अभियोजन पक्ष की ओर से जिरह की गई तो सारी स्थिति स्पष्ट हो गई। जिसमें आरोपी बहू भूरी को अदालत ने दोषी करार देते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा के साथ उस पर 55 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
जेठानी ने जिरह में खोला राज
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नीलम वर्मा ने बताया कि इस मामले में वादी पक्ष और आरोपी एक ही परिवार से ताल्लुक रखते थे। इस कारण वादी पक्ष ने ठोस गवाही नहीं दी लेकिन अभियोजन पक्ष की ओर से जिरह की गई तो दोषी करार दी गई बहू भूरी की जेठानी भूरी पत्नी नवाब हुसैन गवाह के रूप में आई। वह जिरह में पूरी तरह से टूट गई जिसने अदालत को बताया कि उसने मैसर जहां का गला दबाते खुद देखा था। इस घटना को भूरी पत्नी सद्दाम ने अंजाम दिया था। जिसके बयानों के आधार पर ही अदालत अपने नतीजे पर पहुंची और आरोपी बहू को सजा दी।