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हरे कृष्ण महामंत्र जप से प्राप्त होती है भगवत कृपा -अर्द्धमौनी

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मुरादाबाद। टीडीआई सिटी मंदिर में आयोजित श्रीगीता भागवत सत्संग में धीरशांत दास अर्द्धमौनी ने उपदेश दिए। उन्होंने बताया कि कलियुग में भगवान श्री कृष्ण ने नाम के रूप में अवतार लिया है। कलिसन्तरणोपनिषद में वर्णन है कि हरे कृष्ण महामंत्र का साढ़े तीन करोड़ जप करने से मनुष्य भगवत दर्शन कर सकता है। उन्होंने कहा कि प्रेम कम हो तो साढ़े तीन करोड़ जप करने से भी दर्शन नहीं होते और प्रेम अधिक हो तो कम जप करने से भी दर्शन हो जाते हैं।
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त्रिलोकी के स्वामी ब्रह्मा के रूप में विश्व का सृजन करते हैं। विष्णुरूप से उसका पालन-पोषण करते हैं और रुद्ररूप धारण करके विश्व का संहार भी वही करते हैं। उनकी माया को पार पाने का कोई साधन नहीं है। भगवान ने अपने श्रीमुख से कहा है कि जो उत्पन्न होता है उसकी मृत्यु अनिवार्य है। जन्म-मरण के चक्र से छूट जाने का नाम ही मुक्ति है। जिसका मन सुख दुख में समान रह सकता है, उसने सशरीर ही जन्म मृत्यु को जीत लिया है। सत्संग में गुरु प्रसाद शास्त्री, अलका अग्रवाल, ऋतु अग्रवाल, बीना अग्रवाल, विनय अग्रवाल, संजय अग्रवाल, समर्थ अग्रवाल, राजेश भारतीय आदि ने सहयोग किया।
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