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ग्राम पंचायत बरबारा मझरा में डीडीओ की जांच में मिली थी अनियमितता

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मुरादाबाद। शासन के सख्त रुख के बावजूद जिले की ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर की गई गड़बड़ी में संलिप्त अधिकारियों को बचाने की कवायद जिलास्तर पर शुरू कर दी गई है। यही वजह है कि पंचायत राज महकमे के उपनिदेशक की जांच में पकड़ी गई खामियों के आधार पर कमिश्नर द्वारा दोषियों पर कार्रवाई के आदेश को पहले महीनों डीपीआरओ कार्यालय में दबाए रखा गया। बाद में रिमाइंडर भेजने के बाद दो जिला स्तरीय अधिकारियों की जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रतिकूल प्रविष्टि देकर कर्तव्यों की इतिश्री कर ली गई।
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26 दिसंबर 2020 से 27 मई 2021 तक ग्राम पंचायतों की बागडोर प्रशासकों (एडीओ व ग्राम पंचायत सचिव) के हाथ में रही। इस दौरान जिले की ग्राम पंचायतों में करीब 38 करोड़ रुपये के विकास कार्य कराए गए। इनमें तमाम कार्य विभागीय नियमों, कायदों को ताक पर रख कर कराए गए। तत्कालीन डीपीआरओ राजेश कुमार कार्रवाई के बजाय आरोपियों को बचाते रहे। उपनिदेशक (पंचायत) एसके सिंह ने शासन की टीम से पहले मुरादाबाद के ग्राम पंचायत बरबारा मझरा की जांच की, तो उनमें भी इसी तरह की कमियां उजागर हुईं।
उन्होंने एडीओ (पंचायत) आमोद कुमार शर्मा व ग्राम पंचायत सचिव मनोज कुमार सिंह को अनियमितता के लिए दोषी मानते हुए रिपोर्र्ट कमिश्नर को भेजी, जिसके बाद कमिश्नर ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। काफी दिनों तक कार्रवाई न होने पर कमिश्नर ने जब रिमाइंडर भेजा, तो डीपीआरओ ने आनन-फानन दो जिलास्तरीय अधिकारियों की टीम गठित कर उसकी रिपोर्ट के आधार पर करीब साढ़े तीन माह बाद प्रतिकूल प्रविष्ट दे कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली।
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शासन ने माना गड़बड़ी, डीपीआरओ ने नहीं
मुरादाबाद। जिन वाटर कूलरों को बाजार मूल्य से लगभग दोगुनी कीमत पर खरीदने, कार्य योजना को टुकड़ों में कर सक्षम स्तर से वित्तीय स्वीकृति नहीं लेने के आरोपों में शासन स्तर से दोषियों को निलंबित किया गया है, वहीं, ग्राम बरबारा मझरा में उसी कीमत पर लगाने को ग्राम पंचायत की स्वायत्तता बताते हुए आरोपी एडीओ व ग्राम पंचायत सचिव को केवल प्रतिकूल प्रविष्टि देकर छोड़ दिया गया है।
मंडलीय विभागीय अधिकारी की जांच को जिलास्तरीय अधिकारी ने नकारा
मुरादाबाद। उपनिदेशक पंचायत द्वारा प्रशासकों के कार्यकाल में सदर ब्लाक की ग्राम पंचायत बरवारा मंझरा में खर्च की गई धनराशि के सापेक्ष कराए गए विकास कार्यों की निरीक्षण आख्या पर मंडलायुक्त के द्वारा पत्र लिखने के बावजूद कार्रवाई करने के बजाय अन्य विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों से जांच कराया जाना पंचायत राज विभाग मुरादाबाद की मंशा पर सवाल खड़े करता है। आरोपियों को बचाने के लिए समान तथ्यों पर एक बार जांच हो जाने के बाद पुन: जांच ना कराए जाने संबंधी शासनादेश का लाभ लेने के के आरोप पहले भी डीपीआरओ कार्यालय पर लगते रहे हैं।
हाईकोर्ट ने भी नकार दिया था पूर्व की जांच का तर्क
मुरादाबाद। प्रशासकों के कार्यकाल में खर्च की गई शासकीय धनराशि के संबंध में शासन स्तर से की जाने वाली जांच पर रोक लगाने के लिए ब्लॉक कुंदरकी के ग्राम पंचायत सचिवों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर रोक लगाने के लिए मुख्य तर्क इस खर्च की गई धनराशि की पूर्व में एसडीएम और तत्कालीन जिला पंचायत राज अधिकारी राजेश कुमार सिंह द्वारा जांच कर क्लीनचिट दिए जाने को लेकर ही दिया गया था, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट के तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एमएन भंडारी और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने नकारते हुए जांच पर रोक लगाने से इनकार कर चार माह में जांच पूरी करने के लिए आदेश पारित किया था। ऐसे में संबंधित एडीओ व ग्राम पंचायत सचिव को दी गई प्रतिकूल प्रविष्ट में डीपीआरओ द्वारा इस शासनादेश का लाभ दिया जाना चर्चा का विषय बना हुआ है।
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