मुरादाबाद। कृषि विभाग द्वारा फसल अवशेष प्रबंध कार्यक्रम के अंतर्गत पंचायत भवन में आयोजित किसान जागरूकता गोष्ठी में विभागीय अधिकारियों ने किसानों से पराली न जलाने की अपील की।
गुरुवार को आयोजित गोष्ठी का शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. शैफाली सिंह और एडीएम वित्त ने संयुक्त रूप से किया। डॉ. शैफाली सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि पराली से फैलने वाला प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए घातक है। इससे कई बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए किसान पराली न जलाए और इसे जलाने वालों को समझाएं।
एडीएम वित्त प्रीति जायसवाल ने किसानों से कहा कि पराली जलाने से उठने वाले धुएं से सैटेलाइट द्वारा पता चल जाता है कि कि व्यक्ति के खेत में पराली जली है। इसी आधार पर इसे जलाने वाले पर कार्रवाई हो सकती है।
पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र में पराली जलाने पर 15 हजार तक जुर्माना हो सकता है। दो एकड़ क्षेत्र से कम पर 2500 और दो से पांच एकड़ क्षेत्र में पराली जलाने पर पांज हजार तक जुर्माना हो सकता है। इसलिए बेहतर है कि किसान जनहित में पराली न जलाएं। संयुक्त कृषि निदेशक जेपी चौधरी ने कहा कि पराली को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त है। सरकार नहीं चाहती कि किसी किसान पर कार्रवाई हो, इसलिए बेहतर होगा कि पराली न जलाएं।
कृषि उप निदेशक सीएल यादव ने बताया कि पराली जलाने से ऑक्सीजन का दोहन होता है और कार्बन डाईऑक्साइड और सल्फर डाईऑक्साइड की मात्रा बढ़ती है। ऐसे में वहां की मृदा उर्वरता कम हो जाती है, साथ ही मित्र कीट भी मर जाते हैं। इस मौके पर जिला कृषि अधिकारी रितुषा तिवारी, कृषि वैज्ञानिक डॉ. मोहन सिंह सहित विभाग के अधिकारी और वैज्ञानिक मौजूद थे।