मुरादाबाद। लगभग दो साल पुराने दहेज हत्या के मामले में कोर्ट ने पति समेत सास-ससुर को दोषी नहीं माना है। मझोला थाना क्षेत्र की घटना में मुकदमे की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि विवाहिता की मौत हत्या नहीं बल्कि हादसा है, इसलिए पति और सास-ससुर को दोषी नहीं माना जा सकता।
थाना मझोला में जयपाल ने मुकदमा दर्ज कराया था कि उसकी बेटी का विवाह घटना से करीब चार साल पहले सुबोध पुत्र खेमपाल निवासी चौधरपुर के साथ हुआ था। लेकिन दिए गए दहेज से ससुराली जन नाखुश थे। सात फरवरी 2018 को उसकी बेटी राधा के साथ उसके पति सुबोध, सास रामवती व ससुर खेमपाल ने मारपिटाई की और बाद में केरोसिन छिड़क कर आग लगा दी। जिससे राधा 90 प्रतिशत तक जल गई थी। जिसके मृत्यु पूर्व बयान तत्कालीन सीओ रईस अख्तर व सिटी मजिस्ट्रेट रामजीमल ने लिए थे। घटना के दौरान राधा के साथ उसका पति सुबोध भी करीब 40 प्रतिशत तक जल गया था।
केस अपर जिला जज मुरादाबाद की अदालत में सुना गया। आरोपीगण के वकील विक्रम सिंह ने बताया कि मुकदमे के किसी भी गवाह ने घटना की पुष्टि नहीं की जबकि मुकदमे में 12 गवाहों ने अपनी गवाही मुकदमे में दी थी। अदालत को उन्होंने बताया कि यह दहेज हत्या न हो कर मात्र एक घटना थी। जिसमें सुबोध ने अपनी पत्नी को बचाने के लिए भरसक प्रयास किया था। जिससे वह 40 प्रतिशत तक जल भी गया था। जबकि मजिस्ट्रेट व सीओ ने 90 प्रतिशत तक जलने वाली राधा के बयान तो दर्ज कर लिए लेकिन 40 प्रतिशत तक जलने वाले सुबोध के बयान दर्ज नही किए। अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद आरोपियों को हत्या का दोषी न मानते हुए मात्र एक घटना को हादसा मानते हुए पति समेत सास-ससुर को भी मुकदमे से बरी कर दिया है।