मुरादाबाद। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की दिल्ली रोड शाखा से फर्जी हस्ताक्षरों के सहारे साढ़े नौ लाख रुपए के लोन में हेराफेरी का आरोप सामने आया है। इस मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या चार की अदालत ने सुनवाई के बाद परिवाद दर्ज किए जाने के आदेश दिए। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 22 जून की तिथि निर्धारित की है।
मझोला थाना क्षेत्र के आजाद नगर निवासी साउन ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से एसीजेएम कोर्ट नंबर चार स्मिता गोस्वामी की अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। बताया कि उसने वर्ष 2021 में व्यापार करने के लिए धनराशि की आवश्यकता थी। इस बीच उसके परिचित मोहम्मद सदाकत अली और मोहम्मद चांद निवासी लालबाग मुगलपुरा से संपर्क किया। दोनों ने बताया कि उनकी यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की दिल्ली रोड स्थित शाखा के प्रबंधक संजीव मित्तल से अच्छी जान पहचान है। वे लोन करा देंगे। आरोप है कि मोहम्मद चांद ने लोन कराने के नाम पर उससे पांच हजार रुपए भी लिए। इसके बाद बैंक ने उसे साढ़े नौ लाख रुपए का व्यापार के लिए टर्म लोन कर लिमिट बना दी। पीड़ित ने न्यायालय को बताया कि इस लोन में उसकी भाभी जरीना पत्नी वली मोहम्मद गारंटर बनी। लोन स्वीकृत होने के बाद जब वह बैंक गया तो पता चला कि उसके खाते में साढ़े नौ लाख जमा किया गया और उसकी जानकारी दिए बगैर पूरी रकम निकाल ली गई। प्रार्थना पत्र में पीड़ित ने बताया कि इस संदर्भ में जब उसने शाखा प्रबंधक संजीव मित्तल से बात की तो उन्होंने एक विड्रॉल स्लिप दिखाया। जिस पर उसके हस्ताक्षर नहीं थे। आरोप है कि हस्ताक्षर किसी अन्य व्यक्ति ने किया था। अधिक जानकारी करने पर बैंक प्रबंधक ने मेसर्स मां भगवती ट्रेडर्स निकट रामगंगा छड़ियों का मंदिर नवाबपुरा के प्रोपराइटर वीरेंद्र कुमार द्वारा बैंक में दिए गए बिल और कोटेशन संबंधित कागजात दिखाए। बिल और कोटेशन इत्यादि पर फर्जी हस्ताक्षर थे। इन्हीं फर्जी हस्ताक्षर से बिलों और कोटेशन से शाखा प्रबंधक संजीव मित्तल ने फर्जी और कूट रचित कागजात तैयार कर मोहम्मद सदाकत अली, मोहम्मद चांद और वीरेंद्र कुमार ने प्रार्थी के खाते से साढ़े नौ लाख रुपए निकाल कर उसके साथ धोखाधड़ी की है। पीड़ित के मुताबिक इस मामले की शिकायत लेकर वह मझोला थाने गया था लेकिन पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की। इसके बाद उसने 13 अप्रैल 2022 को एसएसपी को भी प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई। फिर भी कोई सुनवाई नहीं हुई। इस मामले की सुनवाई कर रही एसीजेएम स्मिता गोस्वामी की अदालत ने प्रस्तुत वाद पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज किए जाने के आदेश दिए।