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आफत की बाढ़: खुद की ही नहीं, बटाई पर बोई फसल भी हो गई बर्बाद

Sat, 23 Oct 2021 04:26 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद

सार

चंद्र देवी ने बताया कि धान की अधिकांश फसल वह अपने बच्चों के साथ काट कर खेत में रख चुकी थी। कुछ मजदूरों को भी लगाया था। उनसे भी धान बिकने पर मजदूरी देने की बात कही थी।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुरादाबाद के ग्राम वरबाला खास निवासी चंद्र देवी अपने खेत में खराब हो चुकी धान की फसल को आंख में आंसू लिए निहार रही थीं। घर से लेकर खेत तक पर बाढ़ के पानी ने असर डाला। दस साल पहले टीबी से पति की मौत हो जाने के बाद से चंद्र देवी अपने तीन बेटी व एक बेटे के साथ मेहनत मजदूरी कर परिवार का पेट पालती हैं।

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चंद्र देवी ने बताया कि उसके पति के नाम की दो बीघा जमीन है। इसके अलावा तीन बीघा और जमीन बटाई पर ली थी। इसमें भी दो बीघा जमीन में धान और एक बीघा भूमि में उड़द की फसल लगाई थी। फसल काफी बेहतर थी। अगर कट कर बिक जाती तो करीब 50 हजार रुपये की बिकती। इसी के भरोसे बड़ी बेटी की शादी दीपावली के बाद करनी तय की थी।

चंद्र देवी ने बताया कि धान की अधिकांश फसल वह अपने बच्चों के साथ काट कर खेत में रख चुकी थी। कुछ मजदूरों को भी लगाया था। उनसे भी धान बिकने पर मजदूरी देने की बात कही थी। लेकिन अगले ही दिन हुई घनघोर बारिश और उसके बाद कोसी नदी की बाढ़ के पानी से उसकी पूरी फसल बर्बाद हो गई।
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उसे चिंता सता रही है कि अब बेटी के हाथ अगले महीने कैसे पीले होंगे। यही नहीं खाने तक के लिए अनाज नहीं बच पाया। साल भर कैसे गुजर होगा और अगली फसल कैसे बो सकेगी यह चिंता उसे खाए जा रही है।

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