फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जीवित किशोरी को मृत दर्शाने का मामला: आदमपुर के तत्कालीन इंस्पेक्टर सहित 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज के आदेश

Wed, 20 Oct 2021 10:05 PM IST
प्राची प्रियम संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा

सार

आरोपियों ने जीवित किशोरी को मृत दर्शाकर निर्दोष पिता-भाई और रिश्तेदार को ऑनर किलिंग में जेल भेजा था। अब मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। वहीं, आरोपी तत्कालीन इंस्पेक्टर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई चल रही है।
 
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अमरोहा में किशोरी की हत्या के आरोप में निर्दोष पिता-भाई और रिश्तेदार को ऑनर किलिंग में जेल भेजने के मामले में न्यायालय ने आदमपुर थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर समेत 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। इस मामले में षड्यंत्रकारी पुलिस द्वारा आरोपी बनाए गए परिजनों की रिहाई हो चुकी है। न्यायालय के आदेश के बाद पुलिसकर्मियों में हड़कंप मचा है। हालांकि आरोपी इंस्पेक्टर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी चल रही है।
विज्ञापन


यह पूरा प्रकरण आदमपुर थानाक्षेत्र के एक गांव का है। यहां रहने वाले किसान की 15 वर्षीय बेटी छह फरवरी 2019 को खेत से अचानक गायब हो गई थी। 10 फरवरी को किशोरी के भाई ने पांच लोगों के खिलाफ अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने इस मामले में नामजद दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बावजूद इसके किशोरी की बरामदगी नहीं हो सकी थी। 

मुकदमे की विवेचना तत्कालीन इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा कर रहे थे। उन्होंने जेल भेजे गए दोनों नामजद आरोपियों को निर्दोष बताते हुए रिहा करा दिया था। लेकिन, बाद में षड्यंत्रकारी पुलिस ने बड़ा कारनामा कर डाला था। 28 दिसंबर 2019 को किशोरी के किसान पिता, भाई और एक रिश्तेदार को ऑनर किलिंग के आरोप में जेल भेज दिया। पुलिस ने दावा किया था कि परिवार ने बेटी के गलत संगत में पड़ने और गांव में बेइज्जती के डर से उसकी गोली मारकर हत्या कर दी। बाद में शव गंगा में बहा दिया। 
विज्ञापन


पुलिस की झूठी स्क्रिप्ट में बेटी को दो गोली मारना दर्शाया गया था। जबकि किशोरी के कपड़े जंगल में झाड़ी से और तमंचा घर में संदूक से बरामद दिखाया गया था। पुलिस ने शव बरामद किए बिना ही पिता-भाई और एक रिश्तेदार को मुजरिम करार दे दिया था। लेकिन लॉकडाउन के दौरान 7 अगस्त 2020 को किशोरी के जीवित मिलने से षड्यंत्रकारी पुलिस की झूठी स्क्रिप्ट से पर्दा उठ गया था। 

किशोरी अपने गांव से कुछ किलोमीटर दूर प्रेमी के घर में बरामद हो गई थी। इस दौरान किशोरी के पास एक बेटा था और वह गर्भवती थी। बाद में पुलिस ने किशोरी के प्रेमी को भी अपहरण और दुष्कर्म की धाराओं में जेल भेज दिया था। तत्कालीन एसपी डॉ. विपिन ताडा ने फर्जी पर्दाफाश करने वाले इंस्पेक्टर अशोक शर्मा को तत्काल सस्पेंड कर दिया था। 
विज्ञापन

इस पूरे मामले में निर्दोष होने के बाद भी किशोरी के पिता ने 11 माह, भाई नौ और रिश्तेदार को 15 माह जेल की सजा काटनी पड़ी। जेल से छूटने के बाद पीड़ित पिता ने इंस्पेक्टर सहित 14 पुलिस कर्मियों के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत याचिका दायर की थी। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता कुलदीप चौधरी ने बताया कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

साक्ष्यों के अभाव में बचे तत्कालीन एसपी, एसडीएम और सीओ
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता कुलदीप चौधरी ने बताया कि पूरे मामले में तत्कालीन एसपी डॉ. विपिन ताडा, तत्कालीन एसडीएम विजय शंकर और तत्कालीन सीओ कुलदीप कुकरेती को भी आरोपी बनाया गया था। लेकिन न्यायालय ने तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक अशोक कुमार शर्मा सहित 11 पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। जबकि तत्कालीन एसपी, एसडीएम और सीओ के नाम साक्ष्य के अभाव में स्वीकार नहीं किए गए हैं।

यह हैं आरोपी पुलिसकर्मी
-तत्कालीन इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा
-एसआई मोहम्मद आरिफ
-एसआई राकेश कुमार
-एसआई विनोद कुमार त्यागी
-एसआई मनोज कुमार
-सिपाही भूपेंद्र सिंह
-सिपाही कृष्णवीर सिंह
-सिपाही अनिरुद्ध
-सिपाही दीपक कुमार
-महिला सिपाही अपेक्षा तोमर
-महिला सिपाही निधि
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें