जिला अस्पताल में बंदी रक्षक को चकमा देकर भागा बंदी गयूर महज चौबीस घंटे के भीतर पकड़ा गया। सोमवार दोपहर जेल की सर्च टीम ने उसे हापुड़ के गांव चितौली से धर दबोचा। जेल से भागा गयूर चितौली में अपने दोस्त के घर पनाह लिए हुए था। खास बात यह है कि बंदी को पकड़ने में पुलिस के बजाए जेल प्रशासन की भूमिका अहम रही। बिना पुलिस की हेल्प के जेल की सर्च टीमों ने उसे पकड़ा और मुरादाबाद लाकर जेल में बंद कर दिया।
गयूर के पिता ने इस आपरेशन में जेल प्रशासन की मदद की। हापुड़ के पिलखुआ थाना क्षेत्र में सिखेड़ा निवासी गयूर पुत्र आबिद चौधरी एनडीपीएस के मामले में जिला जेल में बंद था। 18 जून को ही वह जेल पहूुंचा था। मझोला पुलिस ने उसे चरस के साथ गिरफ्तार किया था। लेकिन जेल जाने के बाद उसकी तबियत बिगड़ गई थी। मिर्गी के दौरे पड़ने पर उसे जेल से जिला अस्पताल भेज दिया गया था।
जहां वह बंदी रक्षक राजपाल सिंह की कस्टडी में था। लेकिन रविवार सुबह टायलेट जाने के बहाने फरार हो गया था। सीनियर जेल सुपरिंटेंडेंट बीआर वर्मा ने बताया कि सोमवार की दोपहर गयूर को गिरफ्तार कर लिया गया है। फरारी के बाद वह गढ़ मुक्तेश्वर में अपने घर गया था। मूल रूप से सिखेड़ा निवासी गयूर का परिवार अब गढ़ में किराए के मकान में रहता है। यहां वह ज्यादा देर नहीं रुका और फिर अपनी बहन के घर डासना चला गया।
डासना से भी वह जल्दी निकल लिया और रविवार रात को हापुड़ कोतवाली क्षेत्र के गांव चितौली में अपने जिगरी दोस्त के घर पहुंच गया। गयूर के पिता आबिद की सूचना पर जेल की सर्च टीम ने यहां छापा मारा और फरार बंदी को पकड़ लिया। देर शाम उसे जिला जेल में दाखिल कर दिया गया।