सरकारी विभागों में ईंट आपूर्ति की चर्चा
बताया जाता है कि इन भट्ठों पर न सिर्फ ईंटें बनाई जा रही थीं, बल्कि जांच में कई ऐसे भट्ठे भी संचालित मिले, जहां से सरकारी विभागों में होने वाले कार्यों के लिए भी ईंटों की आपूर्ति की जाती है। हालांकि इस मामले में अब अधिकारी स्पष्ट बोलने से बच रहे हैं।
स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं गैसें
विशेषज्ञों का कहना है कि ईंट भट्ठाें से कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड और सल्फर डाई ऑक्साइड गैसें निकलती हैं। इसके अलावा सूट पार्टिकल्स (काले कण), आरएसपीएम (रेस्परेटरी सस्पेंडेड पर्टिकुलेट मेटर) निकलते हैं। ये गैसें और कण नाक के माध्यम से फेफड़ों में जाते हैं।
इसके अलावा मजदूरों को आंख, कान और त्वचा पर भी जमता है तो मजदूराें को इन अंगों से संबंधित बीमारियां होती हैं। यदि हवा का रुख रिहायशी इलाके की तरफ होता है तो लोगों का जीवनयापन दूभर हो जाता है। दमा रोग के अलावा कई बार कैंसर होने तक की भी आशंका रहती है।
सरकारी विभागों में ईंटों की आपूर्ति होने की बात अभी सत्यापित नहीं हो सकी है। लेकिन जिले के 12 ऐसे भट्ठे संचालित मिले हैं, जिनको बंद दिखाया गया है। इस संबंध में क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा है। जवाब मिलने के बाद शासन को मामले से अवगत कराया जाएगा। -अनुज सिंह, डीएम