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स्थान बदलकर बदली सोच का संदेश देना चाहती है कांग्रेस

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मुरादाबाद। आमतौर पर चुनावी कार्यक्रम के लिए जीआईसी और जामा मस्जिद पार्क जैसे मुस्लिम बहुल इलाके को पसंद करने वाली कांग्रेस ने इस बार अपने कार्यक्रम के लिए राम के मैदान को चुना है। 15 नवंबर को लाइनपार के रामलीला मैदान में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की मौजूदगी में होने वाले कार्यकर्ता सम्मेलन को पार्टी की सोच के बदलाव का संदेश देकर हिंदू मतदाताओं को साधने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
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कांग्रेस पार्टी की ओर से वर्ष 2009 का लोकसभा चुनाव क्रिकेटर मोहम्मद अजहरुद्दीन ने लड़ा था। उन्होंने चुनाव लड़ने के दौरान कटघर इलाके में अपना तात्कालिक आवास बनाया था। वर्ष 2014 में बेगम नूरबानो ने चुनाव लड़ा था। उनके पक्ष में प्रचार करने के लिए पार्टी नेता सोनिया गांधी आई थीं। उनकी चुनावी सभा जीआईसी के मैदान में हुई थी। इसी चुनाव के सिलसिले में पार्टी नेता राहुल गांधी ने जामा मस्जिद पार्क में दस्तकारों के साथ बैठक की थी और जामा मस्जिद क्षेत्र की गलियों में घूमकर मुस्लिम मदाताओं से संपर्क किया था। वर्ष 2019 में पार्टी नेता इमरान प्रतापगढ़ी ने चुनाव लड़ा था और जिगर कालोनी में अपना तात्कालिक आवास बनाया था। विधानसभा चुनाव 2012 और 2017 की ज्यादातर जनसभाएं करुला, जामा मस्जिद क्षेत्र में हुई हैं। पार्टी का राजनीतिक इतिहास पलटा जाए तो चुनावी सक्रियता के लिए मुगलपुरा, गलशहीद, असालतपुरा आदि मुस्लिम बहुल इलाके कांग्रेस की पहली पसंद रहे हैं। कांग्रेस के तत्कालीन निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के खातों में भी मुस्लिम मतदाओं का वोट प्रतिशत भी अधिक रहा है।
प्रियंका की स्क्रिप्ट भी हो सकती है हिंदुत्व प्रभावित
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने वाराणसी में दुर्गा मंत्र के साथ सभा की शुरुआत की थी। ऐसे में माना जा रहा है कि मुरादाबाद रामलीला मैदान को कार्यक्रम स्थल के रूप में चुने जाने के बाद प्रियंका गांधी के भाषण में हिंदुत्व को प्रभावित करने वाले शब्दों का इस्तेमाल हो सकता है। इस दौरान हिंदू देवी-देवताओं के जयकारे भी गूंज सकते हैं।
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