अगवानपुर। स्वास्थ्य महकमे की जंग लगी व्यवस्था के कारण ही बुखार पीड़ितों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। लापरवाही की इंतहा यह है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अगवानपुर में बुखार पीड़ितों की जानकारी जुटाने का सर्वे कागजों में ही कर दिया। टीमों ने तीन दिनों में 300 घरों का कागजों में सर्वे करने का दावा किया है। हालांकि हकीकत इसके विपरीत है। धरातल पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से 30 घरों का भी सर्वे नहीं किया गया है। स्थानीय लोगों ने बातचीत के दौरान सर्वे तो दूर स्वास्थ्यकर्मियों के मोहल्लों में आने पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नगर पंचायत अगवानपुर में स्वास्थ्य विभाग की दो टीमों ने 22 से 24 अक्तूबर तक डेंगू और बुखार के मरीजों की संख्या जानने के लिए डोर टू डोर एक सर्वे कराया था। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार मोहल्ला विश्नोई, कुरैशियान, तातारपुर और ढाप में सर्वे किया गया है। अधिकारियों ने दावा किया कि इन तीन दिन में 300 घरों का सर्वे कर मरीजों की संख्या का पता लगाया गया, जिन भी घरों में बुखार के मरीज मिले, वहां साफ सफाई करने और घरों में पानी जमा नहीं करने की हिदायत दी। इसके अलावा घरों में मच्छरदानी का इस्तेमाल की सलाह दी गई। बृहस्पतिवार को स्वास्थ्य विभाग के सर्वे की हकीकत जानने के लिए कई मोहल्लों में संपर्क किया गया। मोहल्ला कुरैशियान निवासी मो रफी, ढाप निवासी सलीम अहमद ने आदि ने सर्वे की बात को एक सिरे से खारिज कर दिया, जबकि मोहल्ला पजाया में तो टीम के कदम ही नहीं गए। इस मोहल्ले के लोगों में स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ रोष व्याप्त है।
ऑटो चालक के बेटे को हुआ था डेंगू, टीम नहीं पहुंची
नगर पंचायत अगवानपुर के मोहल्ला पजाया निवासी राशिद ऑटो चालक है। उनके बेटे मोहसिन की 10 अक्तूबर को डेंगू की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। उसका डेंटल अस्पताल में इलाज चला और 19 अक्तूबर को वह डिस्चार्ज होकर घर आया। इसके बाद ऑटो चालक राशिद, पत्नी हाजर, बहू भूरी ,पौत्री अनमता समेत पूरा परिवार बुखार की चपेट में आ गया। अभी भी परिवार के कई सदस्यों को बुखार की शिकायत है। परिजनों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की कोई भी टीम इनके घर नहीं पहुंची।
मुश्किल से बची जान, टीम एक बार भी नहीं आई
अगवानपुर नगर पंचायत के मोहल्ला पजाया निवासी समशीदा पत्नी अहमद हसन ने बताया कि उसको तकरीबन 10 दिन पूर्व उसको बुखार आया था। उसने चिकित्सकों की सलाह पर दवाई ली, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। दो दिन बाद जांच कराई तो डेंगू पॉजिटिव आ गया। इसके बाद कई दिन तक उसको ड्रिप लगी। महिला के परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है। इलाज में काफी पैसा लग गया। मुश्किल से उसकी जान बची। महिला का कहना अब तक स्वास्थ्य विभाग की टीम उसके घर तो दूर मोहल्ले तक में नहीं आई है।
परिवार बुखार की चपेट में, टीम का पता नहीं
मोहल्ला पजाया निवासी रिफाकत मजदूर है। रिफाकत उनकी पत्नी सोनिया, बेटा शरफराज, बेटी मुस्कान, गुलिस्ता, सोनू समेत सभी परिजनों को बुखार आ रहा है। पड़ोसियों का कहना है कि रिफाकत और उनके परिजनों को 10 दिनों से बुखार आ रहा है। सभी लोग स्थानीय डाक्टरों की सलाह पर उपचार करवा रहे हैं। रिफाकत के परिवार ने भी स्वास्थ्य विभाग के सर्वे पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि अगर सर्वे हो रहा है तो अभी तक उनके परिवार की जानकारी स्वास्थ्य टीम को क्यों नहीं हुई।
मोहल्ला ढाप में डेंगू के मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने शिविर लगाया था। शिविर में बुखार के मरीजों के सैंपल लिए गए। मेरी मां और भाई को बुखार था। दोनो का सैंपल लिया गया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम कब सर्वे कर गई इसकी जानकारी नहीं है। हमारे घर में कोई टीम नहीं आई।
सलीम अहमद, निवासी मोहल्ला ढाप
मोहल्ला कुरैशियान में मेरे घर के पास एक व्यक्ति को डेंगू की पुष्टि हुई थी। इसके बावजूद अभी स्वास्थ्य विभाग से कोई भी टीम घर में नहीं आई है, जबकि मोहल्ले में बुखार से करीब 20 व्यक्ति पीड़ित हैं।
मोहम्मद रफी, मोहल्ला कुरैशियान
विभाग के कर्मचारी सर्वे के नाम पर खानापूर्ति कर रहे हैं। ये लोग किसी एक घर मे बैठकर पूरे मोहल्ले के सर्वे कर देते हैं। कुछ दिन पूर्व ही घर के पास एक बच्चा डेंगू की चपेट में आया था। अभी तक कोई भी टीम सर्वे को नहीं आई है। सर्वे वाली बात केवल कागजों में ही है।
मोहम्मद वसीम, मोहल्ला तातारपुर जामा मस्जिद
जिले से डेंगू मरीजों की सूचना मिलती है। उसी के आधार पर सर्वे कराया जाता है। टीम उस मरीज के यहां व आसपास के घरों में जाती है। टीम द्वारा लोगों को सावधानी बरतने की हिदायत देती है। अभी तक तीन 300 घरों का सर्वे कराया गया है, जिसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है।
डॉ शहाबुद्दीन चिकित्सा अधिकारी पीएचसी अगवानपुर