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एक्यूआई @ 395 पहले झेली कोरोना की मार, अब प्रदूषण भी कर रहा सांसों पर वार

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मुरादाबाद। पीतल नगरी में लगातार बढ़ता वायु प्रदूषण सभी की सेहत के लिए खतरनाक है, लेकिन इससे सर्वाधिक परेशानी उन लोगों को हो रही है जो कोरोना संक्रमण के शिकार हो चुके हैं। मुरादाबाद में कोरोना संक्रमित रह चुके व्यक्तियों में से करीब तीन फीसदी मरीज ऐसे हैं जो इस वक्त प्रदूषण की वजह से सांस की समस्या से पीड़ित हैं। चिकित्सकों का कहना है कि ऐसे मरीजों को दवा की डोज बढ़ाने के अलावा ऑक्सीजन की आवश्यकता भी पड़ रही है।
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सोमवार शाम मुरादाबाद का एक्यूआई 320 था, जो मंगलवार शाम पांच बजे बढ़कर 395 दर्ज किया गया। इसमें पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर 474 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर और पीएम 10 का अधिकतम स्तर 487 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि डब्ल्यूएचओ के मानक के अनुसार पीएम 2.5 का यह स्तर सामान्य से करीब 15 गुना अधिक है। चिकित्सकों का कहना है कि प्रदूषण का अधिक स्तर कोरोना संक्रमित रह चुके व्यक्ति को गंभीर रूप से बीमार कर सकता है, क्योंकि संक्रमण से उसके फेफड़े कमजोर हो चुके होते हैं। ऐसे में उनके प्रदूषण से प्रभावित होने की आशंका बढ़ रही है। पीएम 2.5 कण बहुत महीन होते हैं। सांस के साथ यह शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इससे फेफड़ों में अधिक सूजन हो सकती है। इसलिए इस समय ज्यादा सतर्क और ध्यान देने की आवश्यकता है।
प्रदूषण का शरीर पर असर
- फेफड़ों में सूजन, नाक-आंख में जलन, त्वचा संबंधी परेशानी, नर्वस सिस्टम पर असर, अवसाद, समझने की क्षमता में कमी
इसका रखें ध्यान :
- घर व आसपास धुआं न करें, कोयला आदि न जलाएं
- प्रदूषण सुबह और शाम को ज्यादा होता है, इस समय घर से बाहर न निकलें
- डबल मास्क लगाएं
- जाम, धूल वाली जगहों पर न जाएं
- दवा समय पर लेते रहें
- समस्या होने पर चिकित्सक से संपर्क करें
मुरादाबाद में 39,102 व्यक्तियों को हुआ संक्रमण
मुरादाबाद जनपद में अब तक 39,102 व्यक्तियों को कोरोना संक्रमण हुआ है, जिसमें से 38,748 व्यक्ति संक्रमण से स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 349 की मौत हो गई है। तीन फीसदी के हिसाब से चिकित्सकों का अनुमान है कि करीब 11 सौ व्यक्तियों को इस वक्त सांस की समस्या हो रही है।
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कोरोना संक्रमित रह चुके तीन फीसदी मरीजों को सांस की समस्या हो रही है। उनकी दवा की डोज बढ़ाई जा रही है। फेफड़ों में फाइब्रोसिस होने के कारण इनहेलर लेने के अलावा ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है। कई मरीजों ने ऑक्सीजन का अपने घरों में इंतजाम किया है। रात को सोते समय वे ऑक्सीजन लेते हैं। ऐसे मरीज प्रदूषण, धूल और धूआं से दूर रहें।
डॉ. प्रवीण शाह, आईसीयू इंचार्ज, कोविड एल-2 एमसीएच विंग
ओपीडी में प्रतिदिन सांस की समस्या से संबंधित करीब 20 ऐसे मरीज आ रहे हैं, जो कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। प्रदूषण की वजह से सुबह के समय धुंध रहती है। ऐसे में इन मरीजों को सांस फूलने, असामान्य धड़कन के अलावा रक्तचाप की समस्या हो रही है, जिन मरीजों की दवाई चल रही है, वह अपने चिकित्सक के संपर्क में रहें। सांस और हृदय रोग से पीड़ित व्यक्तियों को सितंबर माह में इन्फ्लुएंजा और न्यूमोकोकल वैक्सीन लगती हैं। जिन लोगों ने यह टीका नहीं लगवाया हो तो वह इसे लगवा लें।
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डॉ. अनुराग मेहरोत्रा, चेयरमैन व चीफ कॉर्डियोलॉजिस्ट, सिद्ध अस्पताल
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