मुरादाबाद। जिले में बचपन खून की कमी से जूझ रहा है। जिले के हर दूसरे बच्चे में खून की कमी है। इसका खुलासा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 में हुआ है। सर्वे में 06 से 59 माह के 67.6 फीसदी बच्चे एनीमिक पाए गए। वहीं 15 से 49 वर्ष आयुवर्ग की 33.6 फीसदी गर्भवती महिलाओं में भी खून की कमी मिली है। ऐसे में गर्भ में पल रहे शिशुओं और दुनिया में कदम रख चुके बच्चों की सेहत पर संकट है। विभाग की इसकी वजह खानपान में कमी और गरीबी मान रहा है।
हर पांच साल पर नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) होता है। इसमें स्वास्थ्य और शिक्षा समेत अन्य बिंदुओं पर सर्वे किया जाता है। एनएफएचएस-5 की जिलेवार रिपोर्ट आ चुकी है। मुरादाबाद की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं के बावजूद यहां के बच्चों और महिलाओं में खून की कमी पाई गई है। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 67.6 फीसदी बच्चों में खून की कमी है। इन बच्चों की आयुवर्ग 06 माह से 59 माह तक है। जिले में इस आयुवर्ग के करीब 2.70 बच्चे हैं। ऐसे ही 15 से 49 वर्ष आयुवर्ग की गर्भवती महिलाओं के सर्वे में 33.6 प्रतिशत गर्भवती एनीमिकपाई गई। ये महिलाएं भी खून की कमी से जूझ रही हैं। खून की कमी बच्चों के शारीरिक विकास में बाधा बन सकती है। ऐसे में बच्चे गर्भ और गर्भ के बाहर भी खून की कमी से लड़ रहे हैं। जो चिंता का विषय है।
- महिलाओं में खून की कमी का सबसे बड़ा कारण जागरूकता की कमी है। गर्भवती को कब और कितने समय पर कौन सी दवा खानी है, महिलाओं को परिवार का बचा हुआ खाना नहीं पर्याप्त भोजन देना चाहिए, इस तरह की कई बातें हैं, जिसपर ध्यान देने की जरूरत है। सरकार कई योजनाएं चला रही है, लेकिन जब तक इन बातों का ध्यान नहीं दिया जाएगा, तब तक महिलाओं में ये सबसे बनी रहेगी। - डॉ. एमसी गर्ग, सीएमओ
- ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं में खून की कमी का प्रतिशत शहर की महिलाओं की तुलना में अधिक है। यह समस्या गर्भवती महिलाओं के लिए काफी जटिल है। खाना कम और जागरूकता के अभाव में गर्भवती के साथ उसके शिशु पर सीधा प्रभाव पड़ता है। प्रसव के दौरान महिलाओं की जान खतरे में रहती है। साथ ही नवजात का भविष्य भी सुरक्षित नहीं रहता है। - डॉ. मोना अग्रवाल, स्त्री रोग विशेषज्ञ
किस में कितनी खून की कमी
- 67.6 फीसदी बच्चों (06 से 59 माह) में 11 मिलीग्राम से कम हिमोग्लोबिन मिला
- 45.5 फीसदी सामान्य महिलाओं (15 से 49 वर्ष) में 12 मिलीग्राम से कम हिमोग्लोबिन मिला
- 33.6 फीसदी गर्भवती महिलाओं (15 से 49 वर्ष) में 11 मिलीग्राम से कम हिमोग्लोबिन मिला
खून की कमी के कारण
- संतुलित आहार नहीं लेना
- पेट में कीड़े होना
- नाखून बड़ा होना
- खाने और पानी में स्वच्छता न होना
- जंक फूड पर निर्भर होना
- शरीर में संक्रमण होना
गर्भावस्था के दौरान एचआरपी के लक्षण
- पेट में तेज दर्द होना
- कमजोरी महसूस करना
- जल्दी थक जाना
- सांस फूलना
- योनि से खून बहना
- पैरों में बेहद सूजन होना
- दौरे पड़ना
- बुखार आना
डाक्टर की सलाह
- हर महीने गर्भवती जांच कराएं
- टिटनेस के टीके लगवाएं
- डाक्टर की सलाह पर गर्भवती को आयरन और कैल्शियम की गोली खिलाएं
- शुरुआत के तीन महीने गर्भवतियों को धूम्रपान से दूर रखें
- हिमोग्लोबीन की जांच कराएं
- गर्भवतियों उचित देखभाल करें
- गर्भवतियों के खानपान पर ध्यान दें