मंजिल उन्हें मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है। पंख से कुछ नहीं होता हौसले से उड़ान होती है। यह कहावत दिव्यांग अनस पर बिल्कुल सटीक बैठती है। दिव्यांग अनस के हौसले में उड़ान है। समझने की ताकत ने उसमें जुनून भर दिया। दिल में पढ़ाई की लगन के कारण कामयाबी की पथ पर आगे बढ़ता चल रहा है। उसका सफर आज आठवीं तक पहुंच गया। मां और छोटे भाई की मदद ने उसके हौसलों में पंख लगा दिए। उसके जज्बे से शिक्षक भी प्रभावित हैं। वह उसकी हरसंभव मदद करने को तैयार रहते हैं।
नगर पंचायत अगवानपुर के मोहल्ला कलालपुरी निवासी अनस (12) पीर का बाजार स्थित कन्या जूनियर हाईस्कूल में आठवीं का छात्र है। उसके पिता पप्पू वेलदार हैं और मां फरजाना गृहिणी हैं। छोटा भाई अमन सातवीं और शादाब राजा पांचवीं का छात्र है, जबकि सबसे छोटी बहन जिकरा है। फरजाना के मुताबिक उनका बेटा अनस दिव्यांग है। उसमें समझने का हुनर है। उसने स्कूल में पढ़ने की जिद ठान ली। वह जब पांच वर्ष का था तो पड़ोसी के बच्चों को यूनिफॉर्म में स्कूल जाता देखकर रोने लगता था। उनके साथ में स्कूल जाने की जिद करता था। मां के मना करने पर मारपीट कर लेता था। परिजनों से स्कूल जाने की जिद पर अड़ जाता था। बेटे की खुशी के कारण महिला ने उसका प्राइमरी स्कूल में दाखिला करा दिया। महिला बेटे को रोज स्कूल छोड़ने और लेने जाती थी। आखिरकार एक दिन महिला की हालत पर शिक्षकों को तरस आया। उन्होंने प्रशासन से बच्चे के लिए व्हीलचेयर की डिमांड रख दी। शिक्षकों के अनुरोध पर प्रशासन ने दिव्यांग अनस को मदद के रूप में व्हीलचेयर मुहैया करा दी। व्हीलचेयर ने उसके हौसलों में चार चांद लगा दिए। अब छोटे भाई के सहारे स्कूल जाने और आने लगा।
कन्या जूनियर हाई स्कूल की प्रिंसिपल रेशमा नकवी ने बताया कि अनस आठवीं का छात्र है। उसका दो साल पूर्व ही यहां दाखिला हुआ है। छात्र अनस बोल और लिख नहीं पाता। केवल समझ लेता है। इसलिए दिव्यांग डिपार्टमेंट से सप्ताह में स्पेशल टीचर कमलेश उसको ट्रेनिंग देने आती हैं। वह उसको एक्टिविटी कराकर समझाने का प्रयास करती हैं। स्कूल की आभा रस्तोगी सहित अन्य शिक्षिका छात्र को एक्शन करके पढ़ाने की कोशिश करती हैं। इसके अलावा उसको विटामिन और आयरन की दवाइयां मुहैया कराने में मदद करती है। पिछले वर्ष स्कूल की तरफ से प्रतिवर्ष अनस को पांच हजार रुपये छात्रवृत्ति भी मिलती है। र
कलालपुरी निवासी पप्पू मजदूर है। उनके परिवार में पत्नी और चार बच्चे हैं। बड़ा बेटा अनस दिव्यांग है। बड़ी मुश्किल से मजदूरी कर परिवार की गुजर बसर करता है। बच्चे की पढ़ाई से उसे भी काफी खुशी है।