मुरादाबाद। कोरोना संक्रमण का खेलों पर जो प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, उसका प्रत्यक्ष प्रमाण सोमवार को गोकुलदास हिंदू गर्ल्स कॉलेज द्वारा आयोजित अंतरमहाविद्यालयीय फुटबाल प्रतियोगिता में देखने को मिला। प्रतियोगिता कराने के लिए जरूरी न्यूनतम टीमें नहीं होने की वजह से प्रतियोगिता को ट्रायल में बदलना पड़ा। आयोजकों के मुताबिक ट्रायल से चुनी गईं खिलाड़ियों के नाम विश्वविद्यालय को भेज दिए गए हैं, ताकि अंतर विश्वविद्यालयीय प्रतियोगिता के लिए विश्वविद्यालय की टीम का गठन किया जा सके।
सोनकपुर स्टेडियम में मुख्य अतिथि एडीएम सिटी आलोक वर्मा, एसपी सिटी अखिलेश भदौरिया, प्राचार्य डॉ. चारू मेहरोत्रा ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया। प्रतियोगिता में मुरादाबाद से गोकुलदास हिंदू गर्ल्स कॉलेज के अलावा दयानंद आर्य कन्या महाविद्यालय और बरेली कॉलेज की टीम पहुंची। ट्रायल के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस हायर स्टडीज पीलीभीत से एक खिलाड़ी, रुक्मिणी महाविद्यालय लोधीपुर राजपूत से एक खिलाड़ी, आरएलएस गर्वनमेंट गर्ल्स कॉलेज से चार खिलाड़ी, अब्दुल रज्जाक पीजी कॉलेज जोया से एक खिलाड़ी, साहू रामस्वरूप महिला महाविद्यालय बरेली से एक खिलाड़ी ने हिस्सा लिया।
प्राचार्य डॉ. चारू मेहरोत्रा ने बताया कि अंतरमहाविद्यालयीय प्रतियोगिता के लिए न्यूनतम पांच टीम का प्रतिभाग करना आवश्यक है। एक टीम में खेलने के लिए 11 खिलाड़ी और पांच अतिरिक्त खिलाड़ी होने चाहिए थे। तीन टीम होने की वजह से ट्रायल कराए गए हैं। चयनित खिलाड़ी नॉर्थ जोन अंतरविश्वविद्यालयीय फुटबाल प्रतियोगिता में एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करेंगे।
ये रहे मौजूद
उप प्राचार्य डॉ. अंजना दास, एमएच कालेज के प्राचार्य डॉ. सुधीर अरोरा, विश्वविद्यालय के पर्यवेक्षक डॉ. अशोक कुमार, डॉ. अंचल गुप्ता, क्रीड़ा प्रभारी शिवानी गुप्ता, डॉ. गीता परिहार, डॉ. अंशु सरीन, डॉ. कविता भटनागर, डॉ. किरण साहू, डॉ. अपर्णा जोशी आदि मौजूद रीं।
नहीं बंट पाए प्रमाणपत्र
प्रतियोगिता नहीं होने की वजह से कोई भी टीम विजेता और उपविजेता नहीं बन सकी। नतीजतन टीम को चैंपियनशिप से हाथ धोने के अलावा खिलाड़ियों को प्रमाणपत्र भी नहीं मिल सके।
इन जिलों में हैं विश्वविद्यालय के कॉलेज
मुरादाबाद, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बदायूं, रामपुर, संभल, अमरोहा और बिजनौर जनपदों में एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध करीब 562 महाविद्यालय संचालित हैं। सभी पाठ्यक्रमों में करीब चार लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, लेकिन प्रतियोगिता कराने के लिए जरूरी करीब 80 खिलाड़ी नहीं मिल पाए हैं।
टीम नहीं बनने के ये माने जा रहे हैं कारण...
- कोरोना संक्रमण की वजह से पिछले वर्ष नहीं हुईं प्रतियोगिताएं
- कॉलेजों में मिड टर्म परीक्षाओं का आयोजन
- कॉलेजों में खेल संसाधनों का अभाव
- कॉलेज स्तर पर खेल प्रतियोगिताएं न होना
- दूसरे जनपदों में महिला खिलाड़ियों को भेजने में अभिभावकों का संकोच
कोरोना संक्रमण की वजह से प्रवेश प्रक्रिया में देरी हुई है। इसके अलावा कॉलेजों में नई शिक्षा नीति लागू होने की वजह से मिड टर्म परीक्षा भी संचालित की जा रही हैं। स्नातक प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए इन परीक्षाओं में बैठना अनिवार्य है। विश्वविद्यालय को खेल सत्र बनाते समय इन बिंदुओं का ध्यान रखना होगा।
डॉ. चारू मेहरोत्रा, प्राचार्य, गोकुलदास हिंदू गर्ल्स कालेज
खेल में जागरूकता की कमी है। बेसिक स्तर पर इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। खासकर महिला खिलाड़ियों को अधिक परेशानी होती है। कोरोना की वजह से विद्यार्थी नए खिलाड़ी के रूप में नहीं आगे आए हैं। खेलों के लिए महाविद्यालयों में प्रतियोगिता का आयोजन किया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थी खेल की ओर आकर्षित हो सकें।
- अरविंद दुबे, खेल विशेषज्ञ, विश्वविद्याल द्वारा नामित