मिर्जापुर। दीपावली पर्व पर आतीशबाजी में आ लगने से झुलसने की घटना होती है। इसके लिए स्वास्थ्य महकमा ने तैयारी तो की है, पर पटाखों से जलने वाले मरीजों के लिए मंडलीय अस्पताल में दवा ही नहीं है। ऐसे में मरीजों को दवा बाहर से लाना पड़ेगा।
दीपावली पर्व पर पर जमकर आतिशबाजी होती है। आतिशबाजी होने पर पटाखों से झुलसने की घटनाएं होती है। आतिशबाजी रात के समय होती है। ऐसे में झुलसने की घटनाएं भी रात के समय होती है। पर्व के दिन निजी अस्पताल बंद ही रहते है। ऐसे में उपचार सरकारी आवास में ही संभव है। मंडलीय अस्पताल में इमरजेंसी 24 घंटे चालू रहती है। मंडलीय अस्पताल में आठ-आठ बेड का पुरुष और महिला बर्न वार्ड है। जहां पर वाताकुनुलित कमरे में मरीज भर्ती रहते है। मरीजों के भर्ती करने की सुविधा तो है, पर उपचार के लिए दवा नहीं है। जलने वाले मरीजों को सिल्वर सल्फा डाइजिन क्रीम लगाया जाता है, जो मंडलीय अस्पताल में काफी समय से नहीं है। ऐसे में मंडलीय अस्पताल में आने वाले ऐसे मरीजों को दवा बाहर से लेनी होगी।
स्वांस रोगी पटाखों से रहे दूर
मिर्जापुर। मंडलीय अस्पताल के फिजिशीयन डा. उमेश श्रीवास्तव ने बताया कि पटाखे जलाने से हवा में बारूद के छोटे कण फैल जाते हैं। जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी के साथ ही आंखों और नाक में जलन की समस्या हो सकती हैं। पटाखों से निकलने वाले प्रदूषक तत्वों में रसायन, जहरीली गैसें धुएं में घुलकर सांस की नलियों में प्रवेश कर संक्रमण पैदा करने के साथ वायु को दूषित करने का काम करती हैं। दमा, फेफड़े आदि की बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए। पटाखे और उसके धुंए से दूरी बनाए रखनी चाहिए। मास्क लगाकर चलें।
पटाखों से आंखों को बचाएं
नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. राम विनय ने कहा कि पटाखे जलाते समय आंखों को लेकर खास सतर्कता बरती जाए ताकि पटाखों से निकलने वाले जहरीले धुएं से आंखों में जलन जैसी परेशानी से बचा जा सके। इसके अलावा आंखों में बारूद की चिंगारी चले जाने पर आंखों की रोशनी तक जा सकती हैं।
क्या बरतें सावधानियां
-कम धुएं और कम आवाज के पटाखे छोड़ें
-मुंह और नाक पर मास्क या कपड़ा लगाएं
-अस्थमा और फेफड़ों की बीमारी से प्रभावित लोग दूर रहें
-हृदय रोगी भी पटाखों को छोड़ने से बचें
यह भी रखें ध्यान
-छप्पर या झोपड़ी के पास पटाखे न छोड़ें
-जलने पर तुरंत डाले ठंडा पानी, फिर लें डॉक्टर की सलाह
-खुले में पटाखे न जलाएं