जिला मुख्यालय स्थित अग्निशमन केंद्र परिसर में बृहस्पतिवार को शहीदों की याद में अग्निशमन सेवा दिवस मनाया गया। अधिकारियों व कर्मचारियों ने वर्ष 1944 आग लगने की घटनाओं में शहीद हुए अग्निशमन कर्मियों को श्रद्धांजलि दी गई। साथ ही आम नागरिकों को आग लगने की घटनाओं पर नियंत्रण के बारे में जानकारी दी गई।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी शंकर शरण राय ने अग्निशमन सेवा दिवस के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 1944 में मुंबई बंदरगाह में एक मालवाहक जहाज में आग लग गई थी। इसमें रुई की गांठें, विस्फोटक व युद्ध उपकरण लदे थे। अचानक लगी इस आग को बुझाने में 66 अग्निशमन कर्मी शहीद हो गए थे। उन शहीद अग्निशमन कर्मियों की स्मृति में प्रतिवर्ष 14 अप्रैल को अग्निशमन सेवा दिवस मनाया जाता है। इसमें संकल्प दोहराया जाता है कि आग की विभीषिका से देशवासियों को बचाने के लिए अग्निशमन विभाग पूरी दृढ़ता से डटा रहेगा।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी के आह्वान पर अग्निशमनकर्मियों ने पूरी निष्ठा व तत्परता के साथ संकट की घड़ी में देश के साथ खड़े रहने का संकल्प दोहराया। शहीद जवानों को सभी सिपाहियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद अग्नि शमन अधिकारी अनिल प्रताप सरोज ने आग से बचाव के उपाय की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आग की सबसे ज्यादा घटनाएं गर्मी के मौसम में होती हैं। ऐसे में सभी को इस दौरान विशेष एहतियात बरतनी चाहिए। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि गेहूं की कटाई के दौरान खेतों में बीड़ी, सिगरेट न पिएं। इसके अलावा जर्जर विद्युत तारों का प्रयोग न करें। कई बार आग की घटनाएं शॉर्ट-सर्किट से भी हो जाती हैैं। ऐसे में जरूरी है कि आम नागरिक एहतियात बरतें। इस मौके पर सुभाष तिवारी, विनाद तिवारी, रमाशंकर लाल, विनोद कुमार, संदीप, उमेेश चंद, छोटे लाल आदि मौजूद रहे।