इसकी जानकारी होते ही पुलिस ने चुनार से गोताखोरों को बुलाकर डूबे लोगों की तलाश शुरू कराई। करीब चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद डूबे हुए तीनों युवकों के शव मिल सके। घटना की जानकारी होते ही पर्यटन स्थल पर सन्नाटा पसर गया। संदीप खरवार का भाई शुभम और उसके साथी शव देखते ही बिलखने लगे। पर्यटन स्थल पर माहौल हादसे के बाद गमगीन हो गया।
हादसे के संबंध में थानाध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने बताया कि चूना दरी जलप्रपात पर सैलानियों को जाने से रोक दिया गया है। भौगोलिक जटिलता के चलते पेड़ों और जंगली रास्तों का सहारा लेकर सैलानी वहां पहुंच रहे हैं। इसे और सख्ती से रोकने का प्रयास किया जाएगा। इधर, प्रिंस और संदीप का शव सोमवार सुबह पांच बजे वाराणसी स्थित उनके घर पहुंचा। दोनों शवों का अंतिम संस्कार एक साथ हरिश्चंद्र घाट पर हुआ।
लंका और चितईपुर के रहने वाले दो युवकों की अहरौरा स्थित चूनादरी में डूबने से मौत के बाद परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। चितईपुर के सुसुवाही निवासी संदीप खरवार, लंका के सामनेघाट मारुति नगर कॉलोनी निवासी सौरभ उर्फ प्रिंस की मौत के बाद से दोस्त और परिजन बेसुध हैं।
मालवीय नगर सुसुवाही निवासी संदीप खरवार के चाचा वीरेंद्र ने बताया कि संदीप का मन नहीं था कि वह चूनादरी जाए। छोटे भाई शुभम की जिद के चलते वह गया। काश शुभम ने जिद नहीं की होती तो यह दिन नहीं देखना पड़ता। संदीप और छोटा भाई शुभम खरवार साथ में चूनादरी घूमने गए थे। शुभम नहाते समय डूबने लगा, जिसे बचाने के लिए संदीप आगे आया, शुभम तो बच गया लेकिन संदीप डूब गया।
संदीप के पिता प्राइवेट सुरक्षा एजेंसी में गार्ड जितेंद्र खरवार के अनुसार संदीप गुरुधाम स्थित मेडिकल स्टोर पर काम करता था। दो भाई और दो बहन में संदीप सबसे बड़ा था। मूल रूप से मऊ के हलधरपुर निवासी दादा रामू बीएचयू से रिटायर्ड होने के बाद मालवीय नगर में घर बनवाकर चार बेटों के साथ रहने लगे।
सबसे बड़े बेटे जितेंद्र के दो बेटों और बेटियों में बड़ा संदीप इंटर की पढ़ाई करने के बाद नौकरी करने लगा। संदीप छह माह पहले शादी समारोह से लौटते समय सड़क दुर्घटना में घायल हुआ था। काफी दवा इलाज के बाद दो महीने पहले ठीक हुआ था। बहन पद्मावती, ज्योति और मां गायत्री रो रोकर बेहाल थीं। घर पर मौजूद चाचा वीरेंद्र खरवार ने बताया कि संदीप घर से जा नहीं रहा था। छोटे भाई की जिद करने पर गया। संदीप सुबह 10 बजे कॉलोनी के रहने वाले वाले मित्र आशु के साथ निकला था।
सामनेघाट के मारुति नगर कॉलोनी निवासी प्रिंस की मौत के बाद घर का चिराग बुझ गया। प्रमोद कुमार सिंह का पुत्र प्रिंस कुमार सिंह अपने चार मित्रों के साथ घूमने गया था। पड़ोस में रहने वाले लोगों ने बताया कि बीएचयू में संविदाकर्मी वार्ड बॉय के पद पर प्रिंस कार्यरत था। प्रिंस के पिता लंका पर मेडिकल स्टोर चलाते हैं।
दो बड़ी बहनों के बाद प्रिंस माता पिता का इकलौता बेटा था। मां की कोरोना के दौरान मौत हो गई। प्रिंस की मौत से घर पर मातम छाया था। प्रिंस के पिता रविवार की सुबह अपने गांव नौतन मधुडुआ छपरा चले गए थे। सुबह 11 बजे प्रिंस कॉलोनी के रहने वाले मुन्ना, विवेक, विनय के साथ चूनादरी गया था। पिता के अनुसार दोपहर में दो बजे फोन पर प्रिंस से बात हुई थी तो वह वापस लौटने के लिए बोला था।