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Mirzapur News: गरज-चमक के साथ झूम कर बरसे मेघ

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बीती रात गरज-चमक के साथ शुरु हुई बारिश दूसरे दिन भी अनवरत जारी रहा। पानी से लबालब धान के खेत से जहां किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे वहीं नगर सहित ग्रामीण अंचलों में सड़को, गलियों और रेलवे पुल के नीचे पानी भरने से राहगीरों को समस्याओं का सामना करना पड़ा।
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पिछले साल अपेक्षा 23 अगस्त तक 24 प्रतिशत से ज्यादा वर्षा का रिकाॅर्ड दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने आगे आने वाले दिनों में भारी वर्षा की चेतावनी दी है।
शनिवार को हुई बारिश से मंडलीय अस्पताल, कलेक्ट्रेट परिसर, रमईपट्टी-पक्का पोखरा मार्ग, शुक्लहा धौरुपुर मार्ग, नटवा रेलवे पुल के अलावा रोडवेज परिसर में जगह-जगह पानी भरा रहा। पानी भरने से बसों में चढ़ने और उतरने में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
चंद्रदीप वार्ड में जल निकासी की व्यवस्था न होने से गलियों में जगह-जगह पानी भरने से मोहल्लेवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश कुमार यादव ने बताया जून 2025 में 22 अगस्त तक कुल वर्षा 617.2 एमएम होनी चाहिए। इस वर्ष 517.9 एमएम बारिश हुई जो 83.9 प्रतिशत है।
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जबकि पिछले साल 327.6 एमएम वर्षा हुई थी। जो 60.3 प्रतिशत है। पिछले साल की तुलना में इस साल लगभग 24 प्रतिशत ज्यादा वर्षा हुई है। बारिश से चार डिग्री अधिकतम तापमान लुढ़क गया। इससे लोगों को भीषण उमस भरी गर्मी से राहत मिली। कृषि विज्ञान केंद्र बरकछा के अध्यक्ष कृषि वैज्ञानिक डॉ. श्रीराम सिंह ने कहा बारिश से धान, अरहर की फसल को अधिक फायदा होगा।
यदि इसी तरह निरंतर बारिश होती रही तो हरी सब्जियों को नुकसान होगा। मौसम पूर्वानुमान के आधार पर ग्रामीण कृषि मौसम सेवा, भू भौतिकी विभाग बीएचयू वाराणसी के नोडल अधिकारी प्रो. रवि शंकर सिंह व तकनीकी अधिकारी मौसम वैज्ञानिक शिव मंगल सिंह ने बताया कि आने वाले दिनों में आसमान में बादल छाए रहने की संभावना है। जिसके फलस्वरूप गरज चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है।
ब्लॉक कार्यालय सामने भरा पानी : पटेहरा। भारी बारिश के बीच खंड विकास कार्यालय व प्रेरणा कैंटीन के सामने पानी भरा रहा। प्रेरणा कैंटीन संचालक गिरिराजी ने बताया कि हल्की बारिश होने पर भी कैंटीन के सामने लगा इंटरलाकिंग पानी से डूब जाता है। चारो तरफ पानी भरने से कैंटीन पर ग्रहण आने से कतराते हैं।
ब्लॉक कैंपस की नाली जाम होने से कार्यालय व कैंटीन के सामने पानी भर जाता है जिससे लोगों को आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी ब्लॉक कैम्पस में पीएचसी भी है। पानी के रास्ते होकर लोग इलाज कराने पीएचसी तक जाते हैं।
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