एसटीएफ ने जब छानबीन की तो पता चला कि सोनभद्र, छत्तीसगढ़ एवं झारखंड में कई कोयले की खदानें हैं। इन कोयलों की खदानों से कोयला खरीद-फरोख्त हेतु इसके आस-पास काफी लोगों ने कोल डिपो खोल रखा है। अमिल वन राजमिलन सिंगरौली में कोयला तस्कर धनंजय सिंह ने भी अपना कोल डिपो वैष्णो इंटरप्राइजेज के नाम से खोल रखा है।
जानकारी करने पर पता चला कि धनंजय सिंह व इसके जैसे नारायण अग्रवाल अनपरा (सोनभद्र) व अन्य कोयला तस्करी के आरोपी अपने-अपने सहयोगियों के माध्यम से विभिन्न तरीकों से कोयले की कालाबाजारी करते हैं।
इनके सहयोगी विभिन्न कोयला खदानों से बिल में अंकित वजन से लगभग 40-50 क्विंटल अधिक कोयला खदान कर्मचारियों की मिलीभगत से अपने ट्रकों में लोड कर तस्करों के बताए गए विभिन्न स्थानों पर लाते हैं। अतिरिक्त लोड किए गए कोयले को अनलोड कर देते हैं। जब इस प्रकार से काफी कोयला एकत्रित हो जाता है तो कोयला तस्कर अपने फर्म का कूटरचित कागज बनाकर विभिन्न कोयला मंडियों आदि में भारी मूल्य पर बेचते हैं।
विभिन्न कोयला आधारित उद्योगों को संचालित करने हेतु सरकार द्वारा न्यूनतम मूल्य पर अनुदानित कोयला आवंटित किया जाता है। इन कोयलों को भी तस्करों द्वारा कम मूल्य पर फैक्ट्री मालिकों से खरीद कर कूटरचित कागजात तैयार कर ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता है। ये लोग 50 हजार रुपये से कम मूल्य का बिल तैयार करते हैं। उसमें भी कोयले की बिक्री दर वास्तविक मूल्य से लगभग 1/10 के बराबर रखते हैं।
इससे ये लोग जीएसटी की भी चोरी करते हैं। वस्तुओं के परिवहन पर नियमानुसार ई-वे बिल नहीं बनाना पड़ता है। धनंजय सिंह एवं इसके जैसे अन्य कारोबारी एक ट्रक में लोड लगभग साढ़े तीन लाख रुपये के कोयले का फर्जी बिल 50 हजार रुपये से कम मूल्य की बना देते हैं।
जिससे ई-वे बिल जनरेट ही नहीं होता है। जिससे इसकी सूचना कर विभाग को नहीं हो पाती है और इस प्रकार इनके द्वारा फर्जी कागजात के आधार पर कोयलों को भी विभिन्न स्थानों पर बेच दिया जाता है। इस प्रकार कोयला की कालाबाजारी सुनियोजित व संगठित तरीके से की जाती है।
अदलहाट और अहरौरा थाना क्षेत्र में कोयला तस्करी का खेल काफी समय से चल रहा है। एक बार तो सीओ ने कोयला पकड़ा था। जिसमें अहरौरा थानाध्यक्ष से विवाद हुआ था। इस मामले ने काफी तूल पकड़ा तो सीओ का ही सर्किल बदल दिया गया था। इसके बाद दो वर्ष पहले अदलहाट थाना प्रभारी की तो थाने की वसूली लिस्ट वायरल हुई थी। जिसमें कोयला तस्करों से थाने में पैसा आने का जिक्र था। इस मामले में एएसपी नक्सल को जांच सौंपी गई थी।