स्मार्ट फोन आने के बाद सोशल मीडिया का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। नगर हो या देहात, क्या बड़े, क्या युवा और क्या बच्चे सभी इसके दीवाने हैं। फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्वीटर, हाइक, इंस्टाग्राम ने सूचना तंत्र को नया विस्तार दिया है। दूसरी ओर ये साइट्स प्यार से लेकर शादी और तलाक तक की वजह भी बन रही हैं।
सिर झुकाए, स्मार्ट फोन पर घंटों चिपके रहनेवालों को इसके नुकसान की कोई चिंता नहीं रहती है, पर पढ़ाई में नंबर लाना है तो छात्र-छात्राओं को इससे दूरी बनाए रखनी होगी। यह कहना है पढ़ाई से अपने स्कूलों का नाम रोशन करने वाले टॉपर छात्रों का। यूपी बोर्ड की बारहवीं में जिले की टॉपर श्रेष्ठा सिंह सोशल मीडिया से कोसों दूर हैं। बताती हैं कि वह स्मार्ट फोन तो इस्तेमाल करती हैं, लेकिन गूगल पर जानकारियां जुटाने के लिए।
उनका कहना है कि पढ़ने वाले बच्चों के लिए सोशल मीडिया का कोई ज्यादा फायदा नहीं है। सीबीएसई से इंटरमीडिएट में 95 फीसदी प्राप्त करने वाली महिमा सिंह ने कहा कि किसी भी चीज के अच्छा और बुरा दो पहलू होता है। स्मार्ट फोन पर घर में ही प्रतियोगी परीक्षाओं के साल्व पेपर, एडमिट कार्ड और जानकारी ली जा सकती है।
सोशल साइट विद्यार्थियों के ठीक नहीं है। बेवजह समय जाया होता है। सीबीएसई इंटरमीडिएट में 94 फीसदी अंक पाने वाले ऋतिक श्रीवास्तव ने कहा कि इंटरनेट में ज्ञान का भंडार है। नेटवर्किंग साइट का सही उपयोग जीवन बना सकता है तो गलत इस्तेमाल बिगाड़ भी सकता है। सोशल साइट्स समय की बर्बादी का कारण हैं। इस पर विद्यार्थी ध्यान न दें। 95 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले हर्षित तिवारी ने कहा कि सोशल साइट से छात्र-छात्राओं को दूरी बनानी चाहिए।