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Mirzapur: सड़क हादसे में इंजीनियर समेत दो की मौत, एक की अगले माह होने वाली थी शादी

Sun, 09 Oct 2022 06:45 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर

सार

मिर्जापुर-वाराणसी राजमार्ग -74 पर मुंदीपुर के पास बाइक सवार दो लोग सड़क पर खड़े ट्रैक्टर-ट्रॉली से जा टकराए। इस हादसे में बाइक सवार दोनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। 
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दुर्घटनाग्रस्त बाइक की सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मिर्जापुर-वाराणसी राजमार्ग -74 पर मुंदीपुर के पास शनिवार रात बाइक सवार दो लोग सड़क पर खड़े ट्रैक्टर-ट्रॉली से जा टकराए। इस हादसे में बाइक सवार दोनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। ट्रैक्टर-ट्रॉली सवार हादसे के बाद बाइक सवारों को किनारे कर मौके से फरार हो गए। सुबह टहलने गए लोगों ने शव पड़ा देख पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शव की शिनाख्त कर परिजनों को सूचना दी। 

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सीखड़ निवासी शिवशंकर शर्मा हिंडाल्को में नौकरी करते हैं। उनके छोटे पुत्र जितेंद्र शर्मा उर्फ दीपक (30) इंजीनियर थे। उनकी नवंबर में शादी होने वाली थी। शादी के के लिए दीपक माता-पिता व ममेरे भाई जितेंद्र कुमार (28) पुत्र शेषमणि शर्मा निवासी ककरहा छटहा थाना पड़री के साथ वाराणसी गए थे।

बीच सड़क पर खड़ा था ट्रैक्टर
शनिवार रात माता-पिता सामान लेकर वाराणसी से हिंडाल्को चले गए। जितेंद्र अपने चचेरे भाई के साथ सीखड़ स्थित गांव लौट रहा था। जितेंद्र ने गांव में अपने बड़े पिता प्रेम शंकर शर्मा को फोन कर बताया था कि वे वाराणसी में ही भोजन करके घर लौट रहे हैं।  उधर, वाराणसी राजमार्ग-74 पर मुंदीपुर गांव के पास ओवरलोड भस्सी लदी ट्रैक्टर की बेयरिंग खराब हो गई थी।

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ट्रैक्टर बीच रास्ते पर खड़ा था। उसकी मरम्मत की जा रही थी। रात में घर लौटते समय बाइक सवार ट्रैक्टर में जा भिड़े। बाइक सवार जितेंद्र शर्मा हेलमेट लगाए हुए थे, लेकिन हादसा इतना भयानक था कि मौके पर ही दोनों की मौत हो गई।

ट्रैक्टर की मरम्मत करा रहे लोग दोनों के शवों को किनारे झाड़ी की ओर कर भाग गए। रविवार को सुबह करीब पांच बजे टहलने गए लोगों ने शव देखकर पुलिस को सूचना दी। सूचना पर पहुंची चुनार पुलिस ने शवों की शिनाख्त कर परिजनों को सूचना दी। बाद में शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। 
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रात होने के कारण परिजनों ने दी थी गांव जाने की सलाह

जितेंद्र उर्फ दीपक बंगलुरु में इंजीनियर थे। उनकी नवंबर माह में शादी होने वाली थी। शादी के लिए वे बंगलुरु से आए थे। वे माता-पिता, बड़े भाई के साथ बनारस कपड़ा खरीदने गए थे। दीपक के पिता सोनभद्र के रेनुकूट स्थित हिंडालको में नौकरी करते हैं। खरीदारी करने के बाद रात में बाकी लोग कार से वाराणसी से सोनभद्र रवाना हो गए।

दीपक और उनके ममेरे भाई को सीखड़ गांव में भेज दिया। परिजनों को क्या पता था कि सीखड़ गांव के रास्ते पर मौत इंतजार कर रही है। मौत की जानकारी मिलने पर परिवार में कोहरमा मच गया। दीपक के ममेरे भाई जितेंद्र पुत्र शेषमणि एमएससी करके नौकरी के लिए तैयारी कर रहे थे। 
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