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जीवन जीने की कला सीखने का माध्यम है रामलीला

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चुनार। नगर में बुधवार की रात श्रीराघवेंद्र रामलीला नाट्य समिति के तत्वावधान में मुकुट पूजन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि रामलीला का मंचन मनोरंजन का मात्र साधन नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखलाने वाला एक धार्मिक साधन है। रामलीला इस बात की प्रेरणा देती है कि हमें अपने माता-पिता अग्रज व अनुज से किस तरह का व्यवहार करना चाहिए।
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मुख्य अतिथि पुलिस उपाधीक्षक रामानंद राय ने कहा कि माता के आदेश पर जहां राजगद्दी त्याग कर श्रीराम चौदह वर्ष वनवास को चले गए। वहीं, अनुज भाई भरत गद्दी पर न बैठकर श्रीराम की चरण पादुका रखकर वन से वापस होने तक पूजा करते रहे। कहा कि समाज के लोगों को श्रीराम व भरत के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने की जरूरत है। श्रीराघवेंद्र रामलीला नाट्य समिति के 178वें मुकुट पूजन रामलीला के पुरोहित योगेश मिश्र व शशिकांत मिश्र ने विधिविधान से मुकुट पूजन कराया। मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथि कोतवाल गोपालजी गुप्ता का समिति की ओर से भाजपा नगर अध्यक्ष चन्द्रहास गुप्ता व समिति के अध्यक्ष अखिलेश मिश्र ने मुख्य अतिथि को अंग वस्त्रम व स्मृति चिह्नि देकर सम्मानित किया। इस दौरान समिति के अध्यक्ष ने बताया कि सरकार द्वारा जारी कोविड-19 गाइडलाइन के अनुपालन के क्रम में इस वर्ष भी 21 दिवसीय रामलीला का मंचन न कर परम्परा को कायम रखते हुए नियमित रामलीला भवन में मुकुट की आरती की जाएगी। इस दौरान संरक्षक बचाऊ लाल सेठ, रामजी साहू, रामआसरे दास, अनिल गुप्ता, गौरीशंकर दीक्षित, गोबिंद जायसवाल, श्याम सुंदर शाह, चन्द्रशेखर, मुन्ना पांडेय, आदि प्रमुख मौजूद रहे ।
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