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Mirzapur News: मंदिर के पास शव दफनाने का विरोध, अभिलेखीय जांच में नहीं मिला कब्रिस्तान

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अहरौरा। चंदौली बॉर्डर पर स्थित मदारपुर गांव में शुक्रवार को मंदिर के पास शव दफनाने को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए। एक पक्ष के लोगों ने शव दफनाने का विरोध किया। आरोप लगाया कि मंदिर से सटी भूमि ग्राम समाज की है, यह कब्रिस्तान नहीं है। मामले की जानकारी होते ही एसडीएम चुनार के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची, लेकिन शव दफनाने को लेकर विवाद सुलझ नहीं सका। देर शाम शव को कुदारन के कब्रिस्तान में दफन कर दिया गया।
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मदारपुर गांव निवासी सद्दाम अली (22) कि शुक्रवार को हृदय गति रुकने से मौत हो गई। परिजन जब शव दफन करने को लेकर मंदिर के पास स्थित स्थान पर दफन करने पहुंचे तो दूसरे समुदाय के लोगों ने विरोध किया। जिसके चलते शव दफन नहीं हो सका। मामले की जानकारी होते ही एसडीएम चुनार राजेश कुमार वर्मा, तहसीलदार चुनार योगेंद्र शरण शाह राजस्व कर्मियों व पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। दोनों पक्षों से वार्ता व मान मनौवल के बाद भी मामला नहीं सुलझा तो राजस्व अभिलेखों में भूमि की पड़ताल की। इसमें कब्रिस्तान का जिक्र नहीं मिला जबकि गांव में चकबंदी हो चुकी है। कब्रिस्तान की भूमि न मिलने पर प्रशासन ने शव दफनाने से किनारा कर लिया। दिन भर की जद्दोजहद के बावजूद दोनों पक्षों में सामंजस्य नहीं बन सका। मामले में मृतक के पिता निजामुद्दीन ने जिला मजिस्ट्रेट को पत्रक देकर आरोप लगाया है कि सैकड़ों वर्षों से इसी भूमि पर शव दफन होता चला रहा है और यह कब्रिस्तान है। कुछ लोगों के विरोध के चलते सद्दाम अली का शव दफन नहीं किया जा सका। एसडीएम चुनार और तहसीलदार को मामले से अवगत कराने के बावजूद शव दफन करने से मना कर दिया गया है।
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इनसेट
मंदिर से मूर्ति निकाल कर नदी में फेंकने की हो चुकी है घटना
अहरौरा। बहुत पहले ऐतिहासिक प्राचीन हनुमान मंदिर से अवांछनीय तत्वों द्वारा शिवलिंग, नंदी और राधा-कृष्ण की मूर्ति निकाल कर नदी में फेंक दिया गया था। जिसके बाद मदारपुर गांव में माहौल बिगड़ा था। हालांकि पुलिस ने गोताखोरों की मदद से नदी में से मूर्ति बरामद कर लिया। खंडित मूर्ति मिली। आरोपी को पकड़कर पुलिस ने जेल भेज दिया। इससे दो पक्षों में तनाव पनपने लगा।
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वर्जन-
मदारपुर गांव में कब्रिस्तान के लिए जमीन की पैमाइश कराई गई, लेकिन गांव में किसी भी स्थान पर बंजर या ग्राम सभा की खाली पड़ी भूमि नहीं मिली। जिसकी वजह से प्रशासन द्वारा गांव में कब्रिस्तान के लिए भूमि नहीं दिया जा सका। चकबंदी के दौरान ही आबादी के हिसाब से कब्रिस्तान के लिए भूमि आरक्षित की जाती है। गांव में कहीं भी कब्रिस्तान के लिए भूमि आरक्षित नहीं है। जिसकी वजह से शव को कुदारन गांव में दफनाए जाने के लिए ले जाया गया है।
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राजेश कुमार वर्मा, उप जिलाधिकारी चुनार
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