मिर्जापुर में दो लोगों को पद्मश्री पुरस्कार मिला है। पहला लोकगायक उर्मिला श्रीवास्तव तो दूसरा पुरस्कार खलील अहमद को मिला है। उनका हस्त निर्मित दरी के क्षेत्र में विशेष योगदान रहा है।
कला, संगीत और हस्तशिल्प के दृष्टिकोण से मिर्जापुर जिले के लिए बृहस्पतिवार का दिन बेहद खास रहा। लोकगायन में उर्मिला श्रीवास्तव के साथ ही हैंडमेड दरी खासकर पंजा दरी के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए खलील अहमद को भी पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना गया।
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इमामबाड़ा क्षेत्र के रहने वाले 75 वर्षीय खलील तीन पीढ़ियों से इस कला से न केवल जुड़े हैं बल्कि इसे समृद्ध बना रहे हैं। खलील को 2000 में तत्कालीन राष्ट्पति एपीजे अब्दुल कलाम ने नेशनल अवार्ड से नवाजा था। 2007 में वस्त्र मंत्रालय के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार शिल्प गुरु से पुरस्कृत किए गए। इनका पूरा परिवार दरी के कारोबार से जुड़ा है।
इनके तीन पुत्र रुस्तम शोहराब, इफि्तखार अहमद, जलील अहमद भी इसी कला से जुड़े हैं। खलील अहमद ने पद्मश्री सम्मान मिलने पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि वर्षों की मेहनत और तपस्या का यह परिणाम है। उन्होंने कहा कि इस पुरस्कार से नई पीढ़ी को इस विधा से जुड़ने का संबल मिलेगा। बता दें कि मिर्जापुर की दरी को जीआई टैग मिला हुआ है।
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जीआई विशेषज्ञ डॉ रजनीकांत ने बताया कि मिर्जापुर की हैंडमेड दरी बेहद खास है। खलील अहमद वर्षों से इस कार्य में जुड़े हैं और उसे एक नई ऊंचाई दी। उन्होंने पुरस्कार के लिए शुभकामनाएं दी।