घटना के दिन से लेकर रविवार तक तलाशी अभियान में कोई सफलता न मिलने पर थक हारकर विकास, राजेश और दीपक ने अपनी अपनी पत्नियों का पुतला बनाकर सांकेतिक अंतिम संस्कार किया। बक्सर निवासी विकास दो दिन पूर्व ही वापस लौट गए थे। उन्होंने वहीं पर पत्नी गुड़िया का सांकेतिक अंतिम संस्कार कर दिया।
राजेश और दीपक इस आस में रुके थे कि एनडीआरएफ की टीम उनके परिजनों को तलाश लेगी। 100 घंटे से ज्यादा व्यतीत होने के बाद पूर्णरूप से निराश होकर राजेश ने पत्नी खुशबू और दीपक ने पत्नी अनीशा का पुतला बनाकर हादसे वाले अखाड़ा घाट के बगल में ही अंतिम संस्कार कर दिया। अंतिम संस्कार की कार्रवाई के बाद समस्त पीड़ित व उनके रिश्तेदार विन्ध्याचल धाम से अपनी पत्नी और बच्चों की यादों के साथ घर के लिए रवाना हो सकते हैं।
जिन हाथों ने मांग में सिंदूर भरा था, आज वही हाथ प्रतीकात्मक पुतले को आग देते समय कांप रहे थे। पिछले पांच दिनों से अपनों के लौटने की आस लिए गंगा की ओर टकटकी लगाने वाली पथरा चुकी आंखें एक बार फिर डबडबा उठीं। उन्हें पत्नियों का अंतिम दर्शन भी नसीब नहीं हुआ। क्रिया कर्म के दौरान घाट पर मौजूद परिजन व स्थानीय लोगों की आंखें भी यह नजारा देख भर आईं। हर कोई तीनों परिवार के गम में दुखी नजर आया।
खोजबीन में जुटी एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम रविवार को भी अखाड़ा घाट पर पहुंच कर खोजबीन में जुटी रही। राज्य आपदा मोचन बल की टीम ने दो घंटे तक घटना स्थल का निरीक्षण किया। आकलन लगाया कि जिस तरीके से नाव गंगा में समाहित हुआ है, उससे यही प्रतीत होता है कि पानी के बहाव के कारण नाव रेत में धस गयी है।
उसके ऊपर रेत जमा हो गयी है, इसलिए नाव का पता नहीं चल पा रहा है। बुधवार को हुई नाव दुर्घटना के पांचवे दिन तक अपने परिजनों के असफल तलाश के पश्चात निराश दो पतियों ने अपनी अपनी पत्नियों के छाया रूपी पुतले का दाह संस्कार घटनास्थल अखाड़ाघाट के समीप ही कर दिया । घटना में तीन लोगों की पत्नियां नाव सहित पानी में समा गई थी।