जिला विज्ञान क्लब के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला के दूसरे एवं अंतिम दिन सोमवार को प्लास्टिक वेस्ट के निस्तारण की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों का कहना था कि प्लास्टिक के अधिक प्रयोग से जीवन को खतरा हो सकता है।
जिला विज्ञान क्लब के समन्वयक सुशील कुमार पांडेय का कहना है कि जहां भी कूड़ा फेंका गया होता है, उसमें विभिन्न रंगों के प्लास्टिक बैग, टूटी फूटी प्लास्टिक की बोतलें दिखाई देती हैं। ये नष्ट नहीं होने वाली वस्तुएं हैं। नष्ट नहीं होने वाली यही प्लास्टिक हमारे पर्यावरण के लिए खतरा बन गया है। डॉ. एसवी यादव ने कहा कि प्लास्टिक से बने थैले समस्या बन गए हैं। इनके कम प्रयोग के संकल्प का कड़ाई से पालन कराया जाये तो कूड़े का प्रबंधन हो सकता है। पीके सिंह ने बताया कि प्लास्टिक इंसानों के साथ ही जानवरों व प्रकृति को भी नुकसान पहुंचा रहा है। केके सिंह ने बताया कि प्लास्टिक से बने लंच बॉक्स, पानी की बोतल और भोजन को गर्म व ताजा रखने के लिए इस्तेमाल में लाई जाने वाली पतली प्लास्टिक वस्तुओं में 175 से ज्यादा दूषित घटक होते हैं, जो लोगों को बीमार करने के लिए जिम्मेदार है। डॉ. संजय ने बताया कि प्लास्टिक की बोतलों में पाए जाने वाला एक खास तत्व मनुष्य के सेहत पर प्रतिकूल असर डाल रहा है। एमके जौहरी ने बताया कि वैज्ञानिकों का मत है कि यदि भोजन गर्म है तो ऐसे खाने को प्लास्टिक के टिफिन में बंद करने पर उसमें दूषित केमिकल चले जाते हैं। अंत में जिला समन्वयक ने कहा कि प्लास्टिक से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए सतर्कता एवं जागरूकता दोनों जरूरी है।