इसकी शिकायत शासन व प्रशासन के अधिकारियों से की तो वे मामले को टालते रहे और जांच नहीं की। इसके चलते पिछले 15 साल से उनका मामला न्यायालय में भी चल रहा है। वे तारीख पर भी जाते हैं और तहसीलदार के सामने बयान भी देते हैं। यही नहीं तहसीलदार के सामने जाकर अपने को जीवित बताते हैं फिर भी वे ध्यान नहीं देते हैं।
थाने में भी राजस्व निरीक्षक और लेखपाल के खिलाफ तहरीर देकर फर्जी तरीके से उनको मृत दिखाकर मेरा नाम काटकर खतौनी में मेरे भाई का नाम चढ़ाने के आरोप में मुकदमा पंजीकृत करने की मांग की, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। भोला सिंह के मामले को पूर्व में कई बार उठाया चुका है। जब मुख्यमंत्री ने मामले को संज्ञान लिया हैं तो सारे अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।