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विंध्याचल: कार्तिक पूर्णिमा पर आदिशक्ति दरबार में उमड़े श्रद्धालु, अनुराधा पौडवाल और उमा भारती ने टेका मत्था

Fri, 19 Nov 2021 09:39 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर

सार

मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री साध्वी उमा भारती ने तीन दिन के प्रवास के अंतिम दिन शुक्रवार को मां विंध्यवासिनी का दर्शन पूजन किया।
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आदिशक्ति दरबार में उमड़े श्रद्धालु, - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कार्तिक पूर्णिमा पर शुक्रवार को आस्थाधाम आदिशक्ति मां विंध्यवासिनी का दरबार श्रद्धालुओं से पटा रहा। मां के भव्य स्वरूप का दर्शन पाकर श्रद्धालु निहाल हो उठे। भक्ति गीत गायिका अनुराधा पौडवाल और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री साध्वी उमा भारती ने मां विंध्यवासिनी का दर्शन पूजन किया।

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अनुराधा पौडवाल  सुबह लगभग साढ़े दस बजे पुरानी वीआईपी मार्ग से वे धाम में पहुंची। गणेश द्वार की तरफ से कतारबद्ध होकर वे गर्भगृह में पहुंची विधि-विधान से दर्शन पूजन किया। इसके उपरांत सड़क मार्ग से वे वाराणसी के लिए प्रस्थान कर गईं।

वहीं मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री साध्वी उमा भारती ने तीन दिन के प्रवास के अंतिम दिन शुक्रवार को मां विंध्यवासिनी का दर्शन पूजन किया। इसके बाद वे वाराणसी रवाना हो गईं। सुबह 11 बजे अष्टभुजा डाक बंगले से नई वीआईपी मार्ग से होते हुए वे विंध्याचल धाम पहुंची।
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हाथों में नारियल चुनरी व प्रसाद लेकर गणेश द्वार की तरफ से मां के गर्भ गृह में प्रवेश किया और मां विंध्यवासिनी का विधि-विधान पूर्वक दर्शन पूजन किया। उन्हें नगर विधायक पं. रत्नाकर मिश्र एवं सुधाकर मिश्र ने दर्शन पूजन कराया। स्वस्ति वाचन के दौरान अनुपम महाराज भी मौजूद रहे। इसके बाद वे सड़क मार्ग से वाराणसी प्रस्थान कर गईं।
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श्रद्धालुओं की भीड़ से पटी विंध्याचल की गलियां व गंगा तट

कार्तिक पूर्णिमा पर शुक्रवार को आस्थाधाम श्रद्धालुओं से पटा रहा। आदिशक्ति मां विंध्यवासिनी के भव्य स्वरूप का दर्शन पाकर श्रद्धालु निहाल हो उठे। गंगा स्नान के बाद मंदिर पहुंचे नर नारियों को बच्चों ने बड़े ही श्रद्धा भाव से देवी धाम में पहुंचकर मत्था टेक सुख समृद्धि की कामना की।

भोर में मंगला आरती के बाद से शुरू हुआ दर्शन पूजन का क्रम देर रात तक अनवरत चलता रहा। मंदिर की परिक्रमा पथ पर जगत जननी के भव्य स्वरूप का दर्शन पूजन करने के लिए नर नारियों और बच्चों का रेला लगा रहा। इस मौके पर मां विंध्यवासिनी का तरह-तरह के पुष्पों और रत्न जड़ित आभूषणों से किया गया था। दिव्य श्रृंगार का दर्शन पाकर श्रद्धालु अभिभूत हो उठे।

मंदिर के बाहर कतार में खड़े श्रद्धालु मां विंध्यवासिनी का जयकारा लगाते हुए मंदिर की तरफ बढ़े चले जा रहे थे। मंदिर पहुंचने के बाद किसी ने झांकी से तो किसी ने गर्भगृह में दर्शन पूजन कर घर परिवार में सुख समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।

दर्शनोंपरांत मंदिर के परिसर में स्थित भगवान गणेश सहित मां काली, मां सरस्वती, मां दुर्गा, मां लक्ष्मी, मां शीतला, बाबा भोलेनाथ, दक्षिण मुखी हनुमान जी, पंचमुखी महादेव जी, राधा कृष्ण, बटुक भैरव, दक्षिण मुखी हनुमान जी सहित अन्य देवी- और देवताओं के मंदिरों में जाकर बड़े ही श्रद्धा भाव से दर्शन पूजन किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने काली खोह स्थित महाकाली, अष्टभुजा पहाड़ पर विराजमान मां अष्टभुजी देवी व मां तारा देवी का भी दर्शन किया। 
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गंगास्नान के साथ दान कर कमाया पुण्य

 कार्तिक पूर्णिमा पर शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। गंगा तट हर हर गंगे के जयघोष से गुंजायमान रहे। स्नान के बाद भक्तों ने दूध, घी, धूप, दीप एवं नैवेद्य आदि गंगा को समर्पित कर दान कर पुण्य का लाभ कमाया।  

विंध्याचल के पक्का घाट सहित अखाड़ा घाट कच्चा घाट, दीवान घाट, गोदारा, बालू घाट, इमली घाट आदि घाटों पर भोर से ही श्रद्धालुओं का रेला उमड़ना शुरू हो गया था। भोर के समय कड़ाके की ठंड के बावजूद गंगा घाट पहुंचे भक्तों ने गंगा में स्नान किया। घाटों पर अलाव की व्यवस्था न होने से भक्तगण परेशान रहे।
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