जिले में बने बीस में से 19 गो आश्रय केंद्र संचालित हो रहे हैं। पटेहरा कला में तैयार गो आश्रय केंद्र अभी चालू नहीं किया जा सका है। जो गो आश्रय केंद्र संचालित हो रहे हैं उनमें से कुछ बंद तो कुछ में हरे चारे और सुविधाओं की कमी है। नगर पंचायत और नगर पालिका की ओर से छुट्टा पशुओं को पकड़ कर गो आश्रय केंद्रों में नहीं रखा जा रहा है जिससे छुट्टा पशु किसानों की फसल चर रहे हैं। इससे गो आश्रय केंद्रों की सार्थकता नहीं सिद्ध हो रही है।
नगर क्षेत्र के लिए नगर पालिका परिषद की ओर से टांडा फाल में बने अस्थायी गो आश्रय स्थल की क्षमता पांच सौ मवेशियों की है लेकिन वर्तमान में 378 पशु रखे गए हैं। प्रभारी अधिशासी अधिकारी अरविंद यादव ने बताया कि पशुओं के लिए चारा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। पशु चिकित्साधिकारी प्रतिदिन पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल करते हैं। पटेहरा कला के दीपनगर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन योजना से एक करोड़ 20 लाख की लागत से बना वृहद गो संरक्षण केंद्र का संचालन अभी शुरू नहीं किया गया है। क्षेत्र में छुट्टा पशु फसल को नष्ट कर रहे हैं। किसान रात्रि जागरण कर फसल की रखवाली कर रहे हैं। किसान मुन्ना सिंह, लालबहादुर कोल, विजय बहादुर सिंह, चिंतामणि कोल ने जिलाधिकारी से गो संरक्षण केंद्र को चालू करने की मांग की है।
कछवा नगर के गोशाला केंद्र में सौ पशु हैं। इनके लिए चारे की व्यवस्था है लेकिन ठंड के मौसम के लिए अभी कोई व्यवस्था नहीं है। देखभाल के लिए दो मजदूर रखे गए हैं। जिगना, छानबे विकास खंड क्षेत्र में नीबीगहरवार व रसौली में गो आश्रय स्थल बनाया गया है। रसौली में लगभग चार लाख रुपये की लागत से बने पशु आश्रय स्थल की क्षमता 34 मवेशियों की है। यहां वर्तमान में 34 मवेशी हैं। नीबीगहरवार में पशु आश्रय स्थल के निर्माण पांच लाख से हुआ है और 40 मवेशियों को रखने की क्षमता है। यहां 53 पशु हैं। यहां कमी सिर्फ हरे चारे की है । राजगढ़, क्षेत्र के गोलहनपुर में बने गो आश्रय स्थल में 113 पशु वर्तमान में हैं। इनके लिए पर्याप्त चारा है। सप्ताह में एक बार पशु चिकित्सक डॉ. मुसद्दर अली पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण करते हैं। पशुओं की रखवाली के लिए पांच लोग लगाए गए हैं। पशुओं को सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक पहाड़ों पर चराया जाता है। शाम को आने पर उन्हें चारा खिलाया जाता है। चुनार, नगर पालिका के जलकल परिसर में अस्थायी गो आश्रय स्थल बनाया गया है। वर्तमान समय में कुल 16 मवेशी मौजूद हैं। आश्रय स्थल में 18 मवेशियों को रखने की व्यवस्था बनायी गयी है। आश्रय स्थल प्रभारी कर निरीक्षक अजीत कुमार ने बताया कि पशुओं के चारा पानी की मुकम्मल व्यवस्था है। लालगंज, तहसील क्षेत्र के बामी में वर्तमान में तीन सौ 96 गो वंश हैं।
इन गो आश्रय स्थल का मुख्य उद्देश्य स्वच्छंद विचरण कर रहे छुट्टा पशुओं को पकड़ कर इन केंद्रों में रखना है लेकिन फिलहाल इधर छुट्टा पशुओं को पकड़ने का कोई अभियान नहीं चलाया जा रहा है जिससे इन केंद्रों का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है।
नगर क्षेत्र का अस्थायी गो आश्रय स्थल टांडा फाल में है। यहां पर्याप्त कर्मचारी लगाकर पशुओं की देखभाल की जा रही है। जिले में कई अन्य विभागों के माध्यम से गो आश्रय स्थल बनाए गए हैं। उनकी देखभाल प्रशासन के माध्यम से होती है।- मनोज जायसवाल, अध्यक्ष, नगर पालिका, मिर्जापुर।