सवा लाख आबादी वाले विकास खंड पहाड़ी के 46 ग्राम पंचायतों के छोटे बड़े कुल 200 गांवों के ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने के लिए वर्ष 2008 में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण शुरू किया गया था। राजकीय निर्माण निगम द्वारा हिनौती ग्राम पंचायत के शिवगढ़ गांव में निर्माणाधीन 30 बेड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दोगुना धनराशि खर्च होने के बाद भी अधूरा पड़ा हुआ है।
क्षेत्र की ग्रामीण जनता को इलाज के लिए 25 से 45 किलोमीटर दूर इलाज के लिए मिर्जापुर व वाराणसी तक की लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इससे मरीजों को समय के अभाव में जिंदगी और मौत से जूझना पड़ रहा है। इसी समस्या को दूर करने के लिए सीएचसी का निर्माण शुरू किया गया था। सीएचसी का निर्माण कार्य शुरू हुए 13 साल बीत गए, लेकिन अभी तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। शासन स्तर से राजकीय निर्माण निगम को तीन करोड़ 32 लाख की लागत से पड़री प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को उच्चीकृत कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में तब्दील करने की जिम्मेदारी दी गई थी। उस दौरान निर्माण कार्य तेजी से शुरू हुआ, लेकिन साल-डेढ़ साल बाद काम की धीमी हो गई। अब तक इस परियोजना में लागत की लगभग दोगुना धनराशि खर्च हो चुकी है, लेकिन अब भी यह अधूरा ही है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को उच्चीकृत कर तीन एकड़ क्षेत्र में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया जाना है। इसमें छह डॉक्टरों के बैठने का कक्ष, ओटी, आवासीय कक्ष, ओपीडी, 30 मरीजों को भर्ती करने के लिए वार्ड, एक बड़ा हाल व किचन का निर्माण शामिल है। वर्तमान में भवन का बाहरी ढांचा तो खड़ा कर दिया गया है, लेकिन बहुत काम अधूरा है। ग्रामीणों की शिकायत पर सपा शासनकाल में प्रदेश के रेशम विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव नवतेज सिंह ने अधूरे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया था। घटिया सामग्री के उपयोग की शिकायत पर प्रोजेक्ट मैनेजर एस के धुरिया सहायक प्रोजेक्ट मैनेजर डीपी सिंह, के अलावा सहायक अभियंता, अवर अभियंता को कड़ी फटकार लगाते हुये उनके खिलाफ जांच कर प्राथमिकी दर्ज कराने के लिये कहा था। तत्कालीन सीएमओ की तरफ से प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई। दोबारा जांच करने पहुंचे प्रमुख सचिव ने मौके का निरीक्षण कर शासन को लिखित रूप से सूचित किया कि पूरा काम घटिया सामग्री से हो रहा है। पूरा ढांचा गिरा कर फिर से निर्माण कार्य कराने की जरूरत है। इस पर राजकीय निर्माण निगम ने संबंधित लोगों से रिकवरी का आदेश दिया था। इस पर संबंधित अधिकारी कोर्ट चले गए थे। उसके बाद से काम ठप पड़ा हुआ है।