जिले में 28 फरवरी तक धान की खरीद की जाएगी, लेकिन अभी तक लक्ष्य के अनुरूप धान खरीद नहीं हो सकी है। लक्ष्य का 74 प्रतिशत ही धान खरीद हो सकी है। विभाग के सामने 23 दिनों में 26 प्रतिशत धान की खरीद करने की चुनौती है। वह भी उस समय जबकि जिले के कई केंद्र बंद कर दिए गए हैं।
भुगतान की स्थिति 60 प्रतिशत से कम होने पर जिले के 17 केंद्र बंद कर दिए गए हैं। इससे किसानों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। वहीं, बृहस्पतिवार को हुई बारिश में कई केंद्रों पर धान बेचने के लिए रखे धान भीग गए। इससे किसान अब नाराज हैं। उनका कहना है कि यदि एक ही नियम के तहत शुरू से खरीद की गई होती तो किसानों को न तो परेशानी उठानी पड़ती और न ही किसी प्रकार का नुकसान झेलना पड़ता। जिले में इस बार दो लाख 29 हजार 500 एमटी धान खरीद का लक्ष्य रखा गया है। इसकी तुलना में एक लाख 72 हजार 81 एमटी धान खरीद की जा चुकी है, जो लक्ष्य का 74 प्रतिशत है।
उधर, हलिया क्षेत्र में रात को हुई बारिश के कारण केंद्र पर तौल के लिए आए किसानों का धान भीग गया। तिरपाल लगाकर किसान केंद्र पर तौल के लिए इंतजार कर रहे हैं। विकास खंड के विपणन केंद्र मवई कलां प्रथम तथा द्वितीय के अलावा सभी केंद्र बंद हैं। मशीन काम नहीं कर रही है। केंद्र बंद होने के पहले से ही किसान ट्रैक्टर ट्राली पर धान तौल के इंतजार में खड़े हैं। रात में बारिश होने के कारण उनकी धान भी भीग गई। ग्राम पंचायत गलरा, देवरी, पूरब भटवारी, दियीया समिति, उमरिया, सीकटा समिति के पीसीयू पर खुले केंद्र पर बीते बुधवार से अचानक पोर्टल कांटा लाक हो जाने धान खरीद बंद हो गई। ऐसे में धान तौल के लिए केंद्र पर काफी संख्या में ट्रैक्टर पर धान लादकर पहुंचे किसान खड़े हैं। इससे किसानों की धान बारिश से भीगने से फजीहत हो रही है। क्षेत्रीय किसान पुरवा निवासी हरिप्रसाद पटेल, राम बहादुर निवासी टेढ़ी, लालती निवासी नौगांवा, बाबूलाल पटेल हीरालाल मिश्र भास्कर मिश्रा निवासी गलरा का कहना है कि धान तौल कराने के लिए नंबर पर आए थे, लेकिन बुधवार से ही कांटा बंद होने के कारण मशीन लॉक हो गई है। इस वजह से तौल नहीं हो पा रही है। रात में बारिश के चलते धान भी भीग गया। क्रय केंद्र प्रभारी संजय शुक्ला ने बताया कि ऊपर से कांटा की तौल बंद हो जाने के कारण धान की खरीदारी रोक दी गई है। डीआरएमओ धनंजय सिंह का कहना है कि भुगतान का 60 प्रतिशत से कम होने पर जिले के 17 केंद्र बंद कर दिए गए हैं। शेष जगहों पर धान खरीद की जा रही है।