मिर्जापुर। सरकार की लाख कोशिश के बावजूद हर गरीब को छत मयस्सर नहीं हो पाई है। प्रधानमंत्री आवास योजना में प्रधानों व सचिवों की मनमानी के चलते 23 हजार 321 घर जारी होने के बावजूद तमाम गरीब आवास के लिए भटक रहे हैं। वंचितों की जरूरत का कारोबार भी किया जा रहा है और आवास के नाम पर कुछ प्रधान और सचिव रुपये भी वसूल रहे हैं, जिसकी शिकायतें जिला प्रशासन को अक्सर मिलती रही हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत दो साल में 23 हजार 321 घर बनाने का लक्ष्य है। इसके लिए बजट भी जारी हो गया है। योजना के तहत झोपड़ी या कच्चे मकान में रहने वालों को पक्का घर बनाने के लिए सहायता दी जाती है। आवास उसी को दिया जाता है, जिसके पास आय का कोई स्रोत नहीं हो। आवेदकों के पास दो पहिया, चार पहिया वाहन, टेलीफोन आदि नहीं होना चाहिे। चयन सामाजिक आर्थिक जनगणना के आधार पर किया जाता है। लाभार्थी को एक लाख 30 हजार रुपये तीन किस्तों में भेजा जाता है। इसमें 44 हजार प्रथम, 76 हजार द्वितीय और 10 हजार अंतिम किस्त होती है। इसके साथ ही मनरेगा में मजदूरी के रूप में 16 हजार 625 रुपए मिलते हैं। इसके अतिरिक्त स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय बनवाने के लिए 12 हजार रुपये दिये जाते हैं। आवास के लिए प्रथम किस्त की धनराशि सभी लाभार्थियों और दूसरी किस्त 20 हजार 18 लाभार्थियों को दे दी गई है। इसी प्रकार तृतीय किस्त की धनराशि 1688 लाभार्थियों को दी जा चुकी है। मार्च 2018 तक आवास पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। मगर निर्माण सामग्री की कीमतों के बढ़ने से आवास बनवाने की रफ्तार धीमी है। इसको देख कर लगता नहीं कि समय से काम पूरा हो पाएगा। परियोजना निदेशक डा. हरिचरण सिंह का कहना है कि विधानसभा चुनाव के चलते पिछले वर्ष का लक्ष्य बाद में प्राप्त हुआ था लेकिन बजट की कमी नहीं है। तेजी से काम पूरा कराया जाएगा। आवास के लिए धन मांगने की शिकायतों की बात स्वीकार करते हुए वह कहते हैं कि लाभार्थी किसी को पैसा न दें यदि कोई मांगता है तो इसकी सूचना बीडीओ को दें। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
दो दिन पूर्व कलेक्ट्रेट पर किया था प्रदर्शन
प्रधानों द्वारा किस प्रकार प्रधानमंत्री आवास योजना से खिलवाड़ किया जा रहा है इसका उदाहरण दो दिन पूर्व ही दिखाई पड़ा था। बुधवार को विकास खंड कोन के अनुरुद्धपुर पूरब पट्टी गांव निवासी पति-पत्नी ने प्रधान के विरुद्ध कलेक्ट्रेट में पहुंच कर प्रदर्शन किया था। उनका आरोप था कि प्रधान ने प्रधानमंत्री आवास दिलाने के लिए पैसे ले लिये हैं।