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शहीदों की यादें संजोए हुए है नगर का शहीद उद्यान

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मिर्जापुर। नगर में स्थित शहीद उद्यान आजादी की लड़ाई में खुद को कुर्बान कर देने वाले शहीदों की यादों को संजोए हुए है। इस उद्यान में शहीद भगत सिंह की मां विद्यावती देवी ने 1965 में शहीद खुदीराम बोस की मूर्ति का अनावरण किया था।
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नगर क्षेत्र के नारघाट मुहल्ले में गंगा तट पर स्थित इस उद्यान की स्थापना सेवानिवृत्त अधिशासी अधिकारी बटुकनाथ अग्रवाल ने की थी। उद्यान में 1963 में चंद्रशेखर आजाद की पहली आदमकद मूर्ति स्थापित की गई। 1965 में खुदीराम बोस की मूर्ति का अनावरण शहीद भगत सिंह की मां विद्यावती देवी ने किया था। शहीद उद्यान में हरियाली के बीच स्थापित अमर शहीदों की मूर्तियां राष्ट्रभक्ति का जज्बा पैदा करती हैं। शहीद उद्यान में बने करीब 35 फीट ऊंची मीनार पर महात्मा गांधी की मूर्ति स्थापित है। उद्यान में भगवती चरण बोहरा, रामप्रसाद बिस्मिल, सुभाष चंद्र बोस, अशफाक उल्ला खां, भीखा जी रुस्तम, केआर कामा, बाबू कुंवर सिंह, रामचंद्र पांडुरंग, तात्या टोपे, योगिराज अरविंद, राजेंद्र नाथ लाहड़ी के अलावा उद्यान के संस्थापक बटुकनाथ की मूर्ति स्थापित है। शहीद उद्यान के मध्य में भारत माता की रक्षा में शहीद हुए ज्ञात-अज्ञात अमर बलिदानियों की याद में शहीद स्तंभ भी स्थापित है।
शहीद उद्यान देशभक्तों के लिए तीर्थ स्थल बना हुआ है। यहां आते ही क्रांतिकारियों के त्याग और बलिदान का हुआ बोध राष्ट्रभक्ति का जज्बा पैदा करता है। भारत की आजादी की ललक लेकर खुद की कुर्बानी देने वाले सपूतों की तमन्ना थी दर्रो-दीवार पर हसरत से नजर करते हैं, खुश रहो अहले वतन अब हम तो सफर करते हैं..। मातृभूमि पर प्राणों को न्योछावर करने वाले शहीदों के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता।
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