उत्तर प्रदेश के बागपत में छह अप्रैल 2011 को हाजी हमीद घर के बाहर बनी दुकान पर थे। वहीं पर कातिलों ने उन्हें गोली मारी। वे गिर पड़े। फिर उनका पेट तलवार से फाड़ दिया। 20 के 20 कातिलों ने उनकी लाश पर पैर रखे और नाचने लगे।
तभी सन्नो झुकी, उसने लाश पर अपने दांत गाड़ दिए। खून पिया और अगले ही पल झटके से उठी। बाल झटकते हुए जोर से एक नारा लगाया। फिर बोली, आज मेरी ईद हो गई। इसके बाद एक हाथ हमीद के खून से रंगा। उसे दीवार पर छाप दिया। इसके निशान आज भी हैं।
मिर्धानपुरा में बेदर्दी से कत्ल किए हाजी हमीद और नवाबुद्दीन उर्फ भूरा के सगे भाई रफीक इस ट्रिपल मर्डर के चश्मदीद हैं। दोनों भाइयों और भतीजे साबिर की हत्या की रिपोर्ट रफीक ने ही दर्ज कराई थी।
उन्होंने अदालत का फैसला आने के बाद अमर उजाला से बातचीत में पूरा घटनाक्रम बयां किया। उनके मुताबिक कत्ल की साजिश का ताना-बाना सन्नो ने बुना था।
यूपी: बागपत के तिहरे हत्याकांड में 19 को उम्रकैद
दरअसल, कुछ दिन पहले सन्नो के पति शाहिद की पाली गांव के पास गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। वह कलक्ट्रेट में कर्मचारी था और हाजी हमीद का दोस्त था। उसकी जगह ही सन्नो को मृतकाश्रित के रूप में नौकरी मिली।
उसे लगता था कि शाहिद की हत्या हाजी हमीद ने कराई। इस मामले में हमीद को जेल भी जाना पड़ा था। उनके जमानत पर आते ही सन्नो ने खून का बदला खून से लेने की ठान ली थी। उसका परिवार उसके साथ था।
वे लोग खून-खराबे का बहाना ढूंढ रहे थे। बार-बार धमकी दे रहे थे। छह अप्रैल 2011 को सन्नो के परिवार के दो युवकों ने हमीद के परिवार की एक लड़की से छेड़छाड़ की।
हमीद इसकी शिकायत लेकर पहुंचे। बस इसी से सन्नो के परिवार को बहाना मिल गया। वे लोग हाजी हमीद के परिवार के खून के प्यासे तो पहले से ही थे।
तलवार और तमंचे लेकर टूट पड़े। सबसे पहले हमीद का कत्ल किया। फिर घर के अंदर जाकर भूरा को मारा। साबिर ने हाथ जोड़े, गिड़गिड़ाया, फिर भी उसे गोली मार दी। उसका अंगूठा भी काट लिया।
हमीद की बीवी शकीला की टांग में गोली मारी। बेटी बुशरा अपनी मां की तरफ दौड़ी, उस पर तलवार से वार किया। इसके बाद कातिल फायरिंग करते हुए खादर की तरफ भागे। वहां यमुना पार करके फिर से काफी देर तक नाचे। वे लोग कत्ल की खुशी मना रहे थे।
जब पुलिस आ गई, तब भाग निकले। तिहरे हत्याकांड के कुछ दिन बाद रफीक पूरे परिवार को लेकर कैराना के रामड़ा गांव में जाकर रहने लगे। वहीं से हर तारीख पर आकर पूरे केस की पैरवी की।
वे तो सबको मारते जा रहे थे
मिर्धानपुरा कांड में तलवार लगने से घायल हुए हाजी हमीद की बेटी बुशरा (11) को भी कत्ल का खौफनाक मंजर पूरी तरह याद है। उसने बताया कि वे लोग (कातिल) किसी को नहीं छोड़ रहे थे, जो भी सामने आ रहा था, उसे ही गोली मार रहे थे, या तलवार से काट रहे थे। न बच्चों पर तरस खा रहे थे, न महिलाओं पर।