दूध में मिलावट के खिलाफ चला ऑपरेशन धड़ाम हो गया। दूध, मावा और पनीर की गुणवत्ता परखने को जो सैंपल लिए गए वह लैब ने बगैर ‘फैट कंटेंट’ और ‘बीआर’ जांचे ही पास कर दिए। जबकि अधिकांश रिपोर्ट इन्हीं दो टेस्ट में फेल होती हैं।
दरअसल, लखनऊ लैब में जहां प्रदेशभर से काफी मशक्कत के बाद यह नमूने भेजे गए थे वहां जांच केमिकल ही नहीं था। जरा सी चूक की वजह से मिलावटखोरों का अपराध पकड़ा नहीं जा सका। अब न उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा और न सजा होगी।
नवंबर और दिसंबर में अभियान चलाया गया था। खाद्य विभाग की टीमों ने डेयरी, मावा बाजार और मिठाई की दुकानों पर छापे मारकर सैंपल लिए थे। यह नमूने जांच को लखनऊ प्रयोगशाला भेजे गए। अकेले मुरादाबाद मंडल से ही 150 सैंपल थे। पहले तो रिपोर्ट ही फंसी रही, लेकिन जब आई भी तो आधी अधूरी।
दरअसल दूध, मावा और पनीर की गुणवत्ता को चेक करने के लिए ‘फैट कंटेंट’ और ‘बीआर’ मापा जाता है। इसी से पता चल जाता है कि दूध में जो घी आ रहा है वह दूध का ही है या फिर किसी रिफाइंड का इस्तेमाल किया गया है। अगर घी है तो बीआर वैल्यू 42.5 आएगी और रिफाइंड या कोई दूसरा तेल मिलाया है तो बीआर वैल्यू 45 से भी ऊपर पहुंच जाता है।
मुरादाबाद, इलाहाबाद, मेरठ, कानपुर और वाराणसी मंडल के पच्चीस जनपदों को जो रिपोर्ट पहुंची है, उनमें न फैट कंटेंट चेक हुआ और न ही बीआर। रिपोर्ट में कहा गया है कि केमिकल की कमी के कारण यह टेस्ट नहीं हो पाए। लिहाजा सभी सैंपल पास हो गए। न कोई मिलावट मिली न ही गड़बड़ी। नमूना भरने की लंबी प्रक्रिया है। मकसद यह है कि कार्रवाई कर मिलावटखोरों में खौफ भरा जाए लेकिन जब बिना जांच ही सेंपल पास होंगे तो ऐसी जांचों से फायदा क्या? यह सवाल विभाग में ही उठने लगा है।
इन बिंदुओं की होती जांच
शुगर, सोडा, स्टार्च, फैट, एसएनएस, यूरिया व ग्लूकोज
इन जिलों की रिपोर्ट आई गलत
मुरादाबाद, रामपुर, संभल, अमरोहा, बिजनौर, मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, बागपत, हापुड़, इलाहाबाद, फतेहपुर, कौशांबी, प्रतापगढ़, कानपुर देहात, कानपुर शहर, इटावा, कन्नौज, औरैय्या, फर्रुखाबाद।