तीन साल से मशीन का इंतजार है। स्वास्थ्य विभाग में 32, मेडिकल कॉलेज में 82 और जिला अस्पताल में 26 चिकित्सकों की कमी है। इनकी भरपाई के लिए पत्राचार चल रहा है, लेकिन इनकी कमी पूरी नहीं हो सकी है। जिला अस्पताल में छह प्राइवेट वार्ड सालों से बंद पड़े हैं। इन्हें शुरू करने की कवायद भी अधूरी रह गई। मेडिकल कॉलेज में 20 प्राइवेट हैं, जिनमें से 10 ही चालू किए जा सके हैं।
-सुपर स्पेशियलिटी ने पकड़ी रफ्तार
अच्छा यह रहा कि एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक ने रफ्तार पकड़ ली है। हृदय रोग और विभिन्न तरह की सर्जरी से संबंधित कई उपलब्धियां हासिल कीं। मेडिकल के छात्रों को कई शोधों में पुरस्कार भी मिले। बंद पड़ी रेडियोथैरेपी चालू हो गई।
कोरोना से रही राहत, डेंगू का हमला जारी
बीमारियों में इस साल कोरोना से राहत रही। इक्का दुक्का मरीज ही मिले। कोई लहर नहीं आई। जो मरीज मिले, वे भी घर पर रहकर की ठीक हो गए। 29 लाख से ज्यादा लोगों को यहां वैक्सीन की डोज लग चुकी है। डेंगू का हमला रहा। एक हजार से ज्यादा मरीज चुके हैं। कई मौतें भी हुईं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग तीन मौतों की ही पुष्टि कर रहा है। इसके अलावा कुत्तों और बंदरों का हमला जारी रहा। एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने वालों की जिला अस्पताल में भीड़ लगी रहती है।
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