वारिस ने कोर्ट में खुद को निर्दोष बताते हुए कहा था कि उसके पास से कोई भी आपत्तिजनक सामान बरामद नहीं हुआ। वह वैध पासपोर्ट के माध्यम से भारत आया था। वर्ष 2017 में मुजफ्फरनगर की कोर्ट ने आशफाकऔर मोहम्मद वारिस को धारा 121 के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई। वारिस पर पासपोर्ट एक्ट और विस्फोटक अधिनियम का आरोप सही पाया था।
2019 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की दो जजों की पीठ ने वारिस की अपील पर सुनवाई की।हाईकोर्ट के आदेश के बाद दिसंबर 2019 को वारिस को जेल से रिहा कर दिया गया। एएसपी ओपी सिंह का कहना है कि इस तरह का कोई मामला जानकारी में नहीं है।
बेटे गुलजार की अपील, पिता को घर पहुंचाने में मदद करें अधिकारी
मोहम्मद वारिस के बेटे गुलजार वारिस की गुहार सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। उसने बताया कि भारत जाने के समय उनके पिता दूध का व्यापार करते थे। मीडिया से उनकी गिरफ्तारी की बात पता चली। हमारी जानकारी में आया था कि 2019 में मेरे पिता को जेल से रिहा कर दिया गया है। उसके बाद से हमें अपने पिता के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। हमें अब यह जानकारी मिली है, लेकिन हम अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हैं कि वह जिंदा है।