घर में दो बेटी, दोनों कामयाब
राजेंद्र सिंह मौर्य की कहानी भी समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत है। बचपन में ही पिता का निधन हो गया। अपने भाई जगवीर सिंह मौर्य के साथ मिलकर जीवन संघर्ष शुरू किया। खेतों में मजदूरी के साथ-साथ पढ़ाई भी की। दिल्ली में नौकरी मिली। इसके बाद परिवार में बड़ी बेटी रुचिका सिंह और छोटी अदिति सिंह ने जन्म लिया। परिवार ने दबाव बनाया कि लड़का भी होना चाहिए, लेकिन राजेंद्र सिंह और मां डॉ. राजवती ने कहा कि बेटियां भी बेटों के ही समान हैं। दंपती ने बेटियों को खूब पढ़ाया। रुचिका सिंह को डॉक्टर बनाया। इन दिनों वह फोर्टिस अस्पताल में जनसेवा कर रही हैं।
अदिति के टिप्स
अदिति कहती हैं कि लक्ष्य हासिल करने के लिए खुद के साथ भी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है। रोज बेहतर करने की कोशिश होनी चाहिए। सही विषयों का चयन, परिवार का सहयोग और मेहनत करने से ही मंजिल तक पहुंचा जा सकता है। परिवार, शिक्षक और समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच बननी चाहिए।
धनौरा सिल्वरनगर गांव की बेटी अदिति का आईएएस में चयन होने पर परिजनों व ग्रामीणों ने बुधवार को मिठाई बांटकर खुशी मनाई। इस दौरान ग्राम प्रधान के आवास पर एकत्र गणमान्य ग्रामीणों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर हर्ष व्यक्त किया। वीर सिंह प्रधान ने बताया कि अदिति ने गांव व जनपद का मान बढ़ाया है। गांव में आने पर बेटी का सम्मान किया जाएगा।
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