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यूपी: रूस-यूक्रेन के युद्ध से मुश्किल में उद्योग जगत, नए ऑर्डर मिलने बंद, पुराने ऑर्डरों पर लागत बढ़ी, फैक्टरियां हो रहीं प्रभावित 

Thu, 03 Mar 2022 12:51 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शामली

सार

उद्यमियों का कहना है कि रूस यूक्रेन युद्ध के बीच संकट आ गया है। उद्योगपतियों ने युद्ध से पहले जो ऑर्डर लिए थे, अब उनकी लागत बढ़ गई है, जिससे नुकसान झेलना पड़ेगा। जिसका जितना बड़ा ऑर्डर, उसे उतना ही अधिक नुकसान झेलना होगा।
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industry new - फोटो : istock
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विस्तार
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रूस व यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध ने उद्योगपतियों की चिंता बढ़ा दी है। तेल, लोहे, प्लास्टिक दाना, पेट्रोलियम सहित अन्य वस्तुओं के दामों में तेजी आई है। इससे जो ऑर्डर पहले मिले थे, युद्ध के बाद उनकी लागत में बढ़ोतरी हो गई है। जिससे उद्योगों को भारी नुकसान झेलना होगा। दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध के कारण निर्यातकों को विदेशों से मिलने वाले ऑर्डर में भी काफी गिरावट आ गई है। युद्ध के कारण पैदा हुए हालातों पर जिले के उद्योगपतियों से बात की गई। जिनका कहना है कि युद्ध के कारण महंगाई बढ़ गई है। इससे आयात की जाने वाली चीजों के दाम बढ़ रहे हैं, जबकि निर्यात की जाने वाले वस्तुओं के दामों में गिरावट आएगी, जिसका सीधा असर उद्योगों पर पड़ेगा।

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प्लास्टिक के गिलास, कप हुए महंगे
कच्चा माल के दाम पहले ही बढ़े हुए थे। रूस व यूक्रेन में चल रहे युद्ध के बाद हालात ज्यादा बिगड़ेंगे। युद्ध के कारण तेल, पेट्रोलियम पदार्थ, लोहा सहित अन्य सामान सब महंगा हो गया है। प्लास्टिक दाना 1500 रुपये क्विंटल तक महंगा हुआ है। इससे प्लास्टिक गिलास व कप महंगे हो गए हैं। युद्ध जैसे हालातों में स्थानीय लोग खाद्य सामग्री व अन्य जरूरी सामान का स्टॉक कर लेते है। यह भी महंगाई बढ़ने का बड़ा कारण है।

उद्योगपतियों ने युद्ध से पहले जो ऑर्डर लिए थे, अब उनकी लागत बढ़ गई है, जिससे नुकसान झेलना पड़ेगा। जिसका जितना बड़ा ऑर्डर, उसे उतना ही अधिक नुकसान झेलना होगा। जब तक युद्ध थम नहीं जाता और हालात सामान्य नहीं हो जाते, तब तक दूसरे देशों से भी आयात-निर्यात प्रभावित ही रहेगा। निर्यातकों को उद्योगों में निर्यात के लिए तैयार माल भी अपने पास ही रखना पड़ रहा है। इन सभी का उद्योगों पर असर पड़ रहा है।- अनुज गर्ग, अध्यक्ष आईआईए।

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युद्ध से बढ़ी महंगाई, उद्योगों को झेलना पड़ेगा नुकसान
यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद सब चीजें महंगी होने लगी हैं। पैकिंग का सामान, खाद्य प्रसंस्करण, खाना पकाने का तेल, देसी घी, लोहे के डिब्बे सब महंगे हो गए हैं। गत्ते के दाम बढ़ने से पेटियां महंगी हो गई हैं। इसके अलावा निर्यातकों ने युद्ध से पहले जो ऑर्डर लिए थे, वो सभी रेट पाबंद हैं, लेकिन अब उनकी लागत बढ़ गई है। जिससे उद्योगों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा। युद्ध से आयात व निर्यात पर कई प्रकार की पाबंदियां लग जाती हैं।

कोरोना काल के बाद से उद्योगपतियों के सामने कंटेनर की उपलब्धता न के बराबर है। भाड़ा भी चार से छह गुना बढ़ गया है, जो आयात-निर्यात के काम को प्रभावित कर रहा है। कंटेनर की उपलब्धता न होने से तैयार माल निर्यातक के पास 10 से 15 दिन तक पड़ा रहता है, जिस कारण माल खरीदने के लिए पार्टी तो तैयार रहती है, लेकिन माल समय पर नहीं पहुंच पाता। इसका नुकसान भी उद्योगपतियों को भुगतना पड़ रहा है।- अंकित गोयल, अध्यक्ष शामली इंडस्ट्रियल एस्टेट मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन।

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लोहे के दाम बढ़ने से रिम-धुरा उद्योग भी संकट में 
दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध का असर अकेले भारत पर ही नहीं पूरी दुनिया पर पड़ेगा। युद्ध के कारण निर्यातकों के करोड़ों रुपये अटक गए हैं। जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, तब तक राशि भी नहीं मिल सकेगी। वहीं आयात-निर्यात भी पूरी तरह प्रभावित रहेगा। अगर युद्ध लंबे समय तक चला तो इसका नुकसान निर्यातकों को झेलना पड़ेगा। लोहे के दाम पहले ही काफी बढ़ हुए थे। पिछले पांच-छह दिन में यह 600 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़े हैं। इंडस्ट्रियल गैस के रेट में भी इजाफा हुआ है। यही हालात रहे तो भारत में भी हाहाकार मच जाएगा। महंगाई बढ़ने से मांग के साथ उत्पादन घटेगा। जिससे कई उद्योग बंद हो सकते हैं। - आलोक जैन, कैरियर व्हील्स। 

रिफाइंड के दाम 30 रुपये लीटर बढ़े 
इस युद्घ से खाद्य पदार्थों पर भी काफी तेजी आई है। रिफाइंड के दाम पिछले पांच-छह दिन में 30 रुपये तक बढ़ गए हैं। सरसों का तेल पर 5 रुपये की वृद्धि हुई है। इसके अलावा मैदा, जीरा और धनिया के दाम भी काफी तेजी से बढ़े हैं। अब महंगाई को कम करने के लिए सरकार को ही हस्तक्षेप करना होगा।-  नवीन गर्ग, थोक किराना व्यापारी।
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