युद्ध से बढ़ी महंगाई, उद्योगों को झेलना पड़ेगा नुकसान
यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद सब चीजें महंगी होने लगी हैं। पैकिंग का सामान, खाद्य प्रसंस्करण, खाना पकाने का तेल, देसी घी, लोहे के डिब्बे सब महंगे हो गए हैं। गत्ते के दाम बढ़ने से पेटियां महंगी हो गई हैं। इसके अलावा निर्यातकों ने युद्ध से पहले जो ऑर्डर लिए थे, वो सभी रेट पाबंद हैं, लेकिन अब उनकी लागत बढ़ गई है। जिससे उद्योगों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा। युद्ध से आयात व निर्यात पर कई प्रकार की पाबंदियां लग जाती हैं।
कोरोना काल के बाद से उद्योगपतियों के सामने कंटेनर की उपलब्धता न के बराबर है। भाड़ा भी चार से छह गुना बढ़ गया है, जो आयात-निर्यात के काम को प्रभावित कर रहा है। कंटेनर की उपलब्धता न होने से तैयार माल निर्यातक के पास 10 से 15 दिन तक पड़ा रहता है, जिस कारण माल खरीदने के लिए पार्टी तो तैयार रहती है, लेकिन माल समय पर नहीं पहुंच पाता। इसका नुकसान भी उद्योगपतियों को भुगतना पड़ रहा है।
- अंकित गोयल, अध्यक्ष शामली इंडस्ट्रियल एस्टेट मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन।
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लोहे के दाम बढ़ने से रिम-धुरा उद्योग भी संकट में
दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध का असर अकेले भारत पर ही नहीं पूरी दुनिया पर पड़ेगा। युद्ध के कारण निर्यातकों के करोड़ों रुपये अटक गए हैं। जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, तब तक राशि भी नहीं मिल सकेगी। वहीं आयात-निर्यात भी पूरी तरह प्रभावित रहेगा। अगर युद्ध लंबे समय तक चला तो इसका नुकसान निर्यातकों को झेलना पड़ेगा। लोहे के दाम पहले ही काफी बढ़ हुए थे। पिछले पांच-छह दिन में यह 600 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़े हैं। इंडस्ट्रियल गैस के रेट में भी इजाफा हुआ है। यही हालात रहे तो भारत में भी हाहाकार मच जाएगा। महंगाई बढ़ने से मांग के साथ उत्पादन घटेगा। जिससे कई उद्योग बंद हो सकते हैं। - आलोक जैन, कैरियर व्हील्स।
रिफाइंड के दाम 30 रुपये लीटर बढ़े
इस युद्घ से खाद्य पदार्थों पर भी काफी तेजी आई है। रिफाइंड के दाम पिछले पांच-छह दिन में 30 रुपये तक बढ़ गए हैं। सरसों का तेल पर 5 रुपये की वृद्धि हुई है। इसके अलावा मैदा, जीरा और धनिया के दाम भी काफी तेजी से बढ़े हैं। अब महंगाई को कम करने के लिए सरकार को ही हस्तक्षेप करना होगा।- नवीन गर्ग, थोक किराना व्यापारी।