बच्चियों को पालने की बात कहकर ले गया था
अरुण ने पुलिस को बताया कि शादी को आठ साल हो गए थे। पत्नी को बेटा नहीं हुआ। पत्नी उसे बेटा नहीं दे सकी। इससे वह परेशान था। आठ दिन पहले वह उससे झगड़ा कर मायके चली गई।
13 अगस्त की दोपहर को अरुण ससुराल पहुंचा और पत्नी से कहा कि वह साथ चले या न चले, लेकिन बेटियों को साथ लेकर जाएगा। दोनों को खुद पालेगा। पत्नी का कहना है कि वह पति के बहकावे में आ गई। यदि दोनों बच्चियों को न देती तो उनकी जान नहीं जाती।
पत्नी साथ आ जाती तो उसकी भी हत्या कर देता
आरोपी अरुण ने यह भी कहा कि यदि पत्नी ससुराल में आ जाती तो 13 अगस्त की रात उसकी भी हत्या कर देता, वह बच गई। इंस्पेक्टर कंकरखेडा तपेश्वर सागर ने बताया कि दोनों बेटियों की हत्या करने के बाद आरोपी अरुण पहले कई घंटे तक शव के पास ही रहा। उसके बाद रात में पैदल नानू नहर के पुल पर पहुंचा और नहर में छलांग लगा दी, लेकिन गोताखोरों ने अरुण को बचा लिया।
इसे तो भगवान भी माफ नहीं करेगा
अरुण को पकड़ने के बाद पुलिस ने नीशू को भी थाने पर बुलाया। वह बदहवास हालत में पहुंची। वह फूटकर रोने लगी। बोली- साहब इसे ऐसी सजा देना जो याद रखे। इसने मेरी जिंदगी खराब कर दी है। मैने इसे बहुत समझाया, लेकिन नहीं माना। साहब, इसे जेल भेज दो, इसको भगवान कभी माफ नहीं करेगा। पुलिस ने आरोपी को जेल भेज दिया।