आतिया साबरी को मिठाई खिलाते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
आतिया कहती हैं कि तीन साल के संघर्ष के दौर में जीत के प्रति आश्वस्त थीं। मेरे मन में विश्वास था और ऊपर वाले पर भरोसा था। दो बेटियों की परवरिश की जिम्मेदारी थी। नसीब ऊपर वाला बनाता है, लेकिन जिंदगी की राह खुद तय करनी होती है। कोने में बैठकर रोने से कुछ हासिल नहीं होता। जीवन में हादसे होते हैं, पर उनसे घबराना नहीं चाहिए, बल्कि लड़ना चाहिए। मैं भी टूटी नहीं, बल्कि बेटियों के चेहरे की मुस्कान से मुझे ताकत मिलती रही और लड़ाई लड़ती रही।
परिवार का मिला पूरा सहयोग
आतिया साबरी ऊर्दू और समाजशास्त्र से एमए हैं। वह कहती हैं कि बेटियों का शिक्षित होना जरूरी, ताकि जागरूक होकर अपने अधिकार पा सकें। वह अपनी एक बेटी को डॉक्टर और दूसरी को सिविल सर्विस में ले जाना चाहती हैं। आतिया ने बताया कि तीन भाइयों में सबसे छोटी हूं। उनके पिता मजहर हसन, भाई मोहम्मद इकबाल डॉक्टर हैं, तो दूसरे भाई रिजवान एनजीओ चलाते हैं और तीसरे भाई अफजाल जल निगम डाक पत्थर में अधिशासी अभियंता हैं। आतिया कहती हैं कि इस लड़ाई में परिवार ने पूरा सहयोग किया, कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया।
नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/