मेडिकल कॉलेज में शुरू होगा डायबिटिक रेटिनोपैथी का इलाज
मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में डायबिटिक रेटिनोपैथी का इलाज शुरू करने तैयारी है। इसमें शुगर के मरीजों की आंख न खराब हो, इसके लिए समय रहते स्क्रीनिंग और इलाज दिया जाएगा। उपचार केंद्र खोलने के लिए करीब दो करोड़ रुपये का बजट मिलेगा।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने अपने पहले कार्यकाल में चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना से इसकी सिफारिश की थी। उनका प्रयास रंग लाया है। मेडिकल कॉलेज में दो करोड़ की लागत से डायबिटिक रेटिनोपैथी क्लीनिक बनेगा। इसमें जांच के लिए हाईटेक मशीनों की खरीद की जाएगी। शुगर के सभी मरीजों की स्क्रीनिंग की जाएगी। प्रशिक्षित स्टाफ मरीजों का रिकार्ड बनाएगा। एक रेटिना विशेषज्ञ भी नियुक्त किया जाएगा।
डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि शुगर के मरीजों के लिए ये बड़ी सौगात होगी। उम्मीद है इस साल इसकी शुरुआत हो जाएगी। उन्होंने बताया कि शुगर की बीमारी के पांच साल बाद आंख के रेटिना पर असर पड़ना शुरू होता है। शुगर के हर मरीज की आंख की रोशनी नहीं जाती। मरीजों का इलाज लेजर और ऑपरेशन से भी होता है। शुगर के मरीज को हर छह माह में एक बार रेटिना की जांच जरूर करानी चाहिए। मेडिकल में ऐसे करीब 250 से 300 मरीज़ हर माह आते हैं।
मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर लोकेश कुमार ने बताया कि बिगड़ती जीवनशैली से कम उम्र में भी लोग शुगर के मरीज बन रहे हैं। इन मरीजों में अंधता का खतरा बना रहता है, ऐसे में वक्त पर स्क्रीनिंग कर इलाज किया जाना जरूरी है।
क्या डायबिटिक रेटिनोपैथी
डायबिटिक रेटिनोपैथी एक बीमारी है, जो ब्लड शुगर से पीड़ित व्यक्ति के रेटिना (आंख का पर्दा) को प्रभावित करती है। यह रेटिना को रक्त पहुंचाने वाली बेहद पतली नसों के क्षतिग्रस्त होने से होता है। समय पर इलाज न कराने से पूर्ण अंधापन भी हो सकता है।
बीमारी के लक्षण
अनियंत्रित मधुमेह के कारण रक्त नलिकाओं में शर्करा इकट्ठा हो जाती है। इससे रक्त नलिकाओं में रक्त प्रवाह प्रभावित होता है। कॉर्निया में धब्बा पड़ जाता है। धुंधला नज़र आना या फिर दोहरी दृष्टि हो जाती है। आंखों में दर्द भी रहता है।
इन बातों का रखें ख्याल
- वजन न बढ़ने दें, 30 से 40 मिनट रोज़ व्यायाम करें
- फास्ट फूड और तैलीय सामग्री से बचें
- 40 साल की उम्र के बाद रेटिनोपैथी की जांच कराएं
- मधुमेह और उच्च रक्तचाप होने पर आंखों की जांच कराएं