विश्व एड्स दिवस आज : हर माह मिल रहे एचआईवी के 40 मरीज
अरीश रिज़वी
मेरठ। लापरवाही और जागरूकता का अभाव, नतीजा ह्यूमन इम्यूनो डिफिशिएंसी वायरस (एचआईवी)। मेडिकल कॉलेज के एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर की इस साल एक जनवरी से 31 अक्तूबर 2019 तक की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि हर माह एचआईवी के 40 नए मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। इस दौरान 400 नए मरीज आए हैं। एड्स का सबसे बड़ा कारण असुरिक्षत यौन संबंध हैं। करीब 90 फीसदी मरीजों में यही वजह मिली है। लगभग पांच फीसदी को संक्रमित रक्त चढ़ने से और 5 फीसदी ऐसे रहे हैं, जिन्हें पैदाइश से ही यह बीमारी मिली है।
एड्स एक ऐसी महामारी है जो पूरे विश्व में फैल चुकी है। इस बीमारी के प्रति जागरूकता के लिए 1988 के बाद से एक दिसंबर को हर साल पूरे विश्व में विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है। मेडिकल कॉलेज के एआरटी सेंटर की शुरुआत वर्ष 2005 में हुई थी। पहले साल महज तीन मरीज आए थे, लेकिन जैसे-जैसे लोगों में जागरूकता बढ़ी है और लोग एचआईवी टेस्ट करा रहे हैं, वैसे-वैसे तादाद बढ़ती जा रही है। यहां करीब 10 हजार लोग एचआईवी का इलाज कराने आ चुके हैं। यहां अब एचआईवी पीड़ित चार हजार मरीजों का इलाज चल रहा है।
एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनो डिफीसिएंसी वायरस) की एड्स (एक्वायर्ड इम्यूनो डेफीसिएंसी सिंड्रोम) को अंतिम स्टेज माना जाता है। स्वस्थ शरीर में 800-1200 सीडी फॉर (शक्तिवर्धक कण) होते हैं, एचआईवी इन कणों को नष्ट करने लगता है, 350 सीडी फॉर होने पर कई बीमारी जकड़ लेती हैं। इलाज से मर्ज ठीक नहीं होता, यह स्टेज एड्स रहती है।
लापरवाही से बढ़ रहे मामले
एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) एचआईवी के वायरस को शरीर में बढ़ने से रोकती है। जिससे वायरस की मात्रा कम हो जाती है। ऐसे में घबराना नहीं चाहिए, इलाज कराना चाहिए। लोगों के लापरवाही बरतने से एचआईवी के मरीज बढ़ रहे हैं।
- डॉ. तुंगवीर सिंह आर्य, प्राचार्य-विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज
एचआईवी के कारण
- एक से अधिक लोगों के साथ असुरक्षित यौन संबंध से
- एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाने से
- संक्रमित सुईं एवं सिरिंज के इस्तेमाल से
- एचआईवी संक्रमित गर्भवती मां से उसके होने वाले बच्चे को
बरतें सावधानी
- शादी से पहले युवक-युवती एचआईवी जांच कराएं
- असुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित रक्त सुईं से बचें
- सामान्य व्यक्ति भी बच्चों की जांच कराएं
- पौष्टिक भोजन और स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं
- धूम्रपान, मदपान, नशीली दवाओं का सेवन न करें
- व्यायाम करें, शारीरिक स्वच्छता पर ध्यान दें
एचआईवी के लक्षण
- वजन कम होना और किसी भी बीमारी में दवा का असर न होना
- गले-मुंह में लगातार छाले रहना और उल्टी व दस्त की समस्या
- खुजली, हरपीज और गुप्त रोग होना
मेडिकल में एचआईवी की जांच निशुल्क कराएं
- स्वैच्छिक जांच एवं परामर्श केंद्र (ओपीडी-18)
- माता-पिता एवं नवजात शिशु सुरक्षा केंद्र (ओपीडी-13)