बताया गया कि तीन साल पहले जब गोदाम में आग से लाखों का नुकसान हो गया, तभी बेटी की शादी भी होनी थी। खुद को कर्ज से उबारने के लिए बिजली बंबा बाईपास पर एक फार्म हाउस किराए पर लिया। उम्मीद थी कि हालात सुधर जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
इसी बीच, मार्च 2020 में कोरोना की दस्तक ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया। विवाह आयोजनों पर रोक के कारण कारोबार सिमटता गया, कर्ज बढ़ता गया। कर्ज देने वाले लोगों के दबाव के कारण संदीप सहित पूरा परिवार तनाव में था।
‘जीने का कोई मकसद ही नहीं बचा था’
मेडिकल थाना पुलिस ने अस्पताल में भर्ती संदीप और उसके बेटे के बयान दर्ज किए। पुलिस के मुताबिक, संदीप ने बताया कि अब जीने का कोई मकसद नहीं बचा था। इसके चलते तीनों ने सल्फास खाकर जान देने का फैसला लिया था। मौत के अलावा दूसरा कोई रास्ता उनके पास नहीं था।
पत्नी और बेटे के बारे में पूछते रहे संदीप
पुलिस ने बताया कि पत्नी रश्मि की मौत के बारे में संदीप को नहीं बताया गया था। हालांकि संदीप बार-बार अपनी पत्नी और बेटे के बारे में पूछते रहे। कारोबारी के जानकार कुछ और लोग भी पहुंचे। पड़ोस के लोग भी इस घटना से हैरत में रहे।
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