सरकारी खजाने को लगा चूना, लाखों की मशीनें बनी शोपीस
मेरठ। स्वच्छता सर्वेक्षण में वाहवाही लूटने के इरादे से निगम प्रशासन ने 36 लाख रुपये कूड़ा कर दिए, लेकिन कूड़ा निस्तारित नहीं हो पाया। तीन स्थानों पर लगी ये मशीनें नगर निगम अधिकारियों की कार्य प्रणाली और सरकारी धन के दुरुपयोग की पोल खोलने के लिए काफी हैं। अब ये मशीनें खुद ही कूड़े में तब्दील हो गई हैं।
नगर निगम ने 2019 में स्वच्छता सर्वेक्षण की परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए बच्चा पार्क स्थित रैनबसेरा परिसर में 26 लाख रुपये की मशीन लगाई थी। उस समय नगर निगम के अधिकारियों ने मशीन में कूड़े को जलाने और पर्यावरण को कोई नुकसान न होने का सपना दिखाया था। एक नहीं बल्कि दो-दो नगरायुक्तों ने मशीन का शुभारंभ करके शासन स्तर पर वाहवाही लूटी थी। उसके बाद न तो यह मशीन चली और न ही किसी अधिकारी ने इस मशीन की सुध ली।
यहां लगी थी मशीन
- नगर निगम ने भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी के प्रस्ताव पर बुढ़ाना गेट स्थित धर्मधर्मेश्वर महादेव मंदिर में चढ़ाए जाने वाले फूलों को निस्तारित करने और वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के लिए सात लाख रुपये से दो मशीनें खरीदकर लगाई थीं। एक माह तो वह मशीन चली, लेकिन उसके बाद मशीन खुद ही कूड़ा बन गई।
- चौ. चरण सिंह जिला कारागार में कूड़े से वर्मी कंपोस्ट बनाने वाली मशीन लगवाई थी। जिसका संचालन जेल कर्मियों द्वारा किया जा रहा था लेकिन रखरखाव नगर निगम को करना था। यह मशीन तीन-चार माह चली। उसके बाद बंद हो गई।
शहर में 200 से अधिक स्थानों पर लगाई थी वर्मी कंपोस्ट यूनिट
शहर में पार्क, कार्यालय परिसरों में खड़े पेड़ पौधों के पत्तों को निस्तारित करके वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के लिए यूनिट लगाई गई थी। 15-20 लाख रुपये खर्च किए गए थे। इतना ही नही शहर में काफी घरों में किचिन से निकलने वाले कूड़े से वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के लिए छोटी यूनिट लगाई गई थी। निगम प्रशासन की यह कार्रवाई स्वच्छता सर्वेक्षण की शर्तों को पूरा करने के लिए अच्छी साबित हुई लेकिन धरातल पर इसका कोई असर नहीं दिखा।
वर्जन
सभी मशीनों के संचालन की जिम्मेदारी सफाई इंस्पेक्टर रवि शेखर को दी गई है। हमने भी उनको नोटिस जारी किया है। कर्मचारी तैनात करके बच्चा पार्क रैन बसेरा परिसर और धर्मधर्मेश्वर महादेव मंदिर की मशीनों का संचालन कराया जाना चाहिए। सफाई इंस्पेक्टर से जवाब तलब किया जाएगा।
-डॉ. गजेन्द्र सिंह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी